आजमगढ़, उत्तर प्रदेश: यथार्थ गीता के प्रणेता और विश्व गौरव से सम्मानित योगेश्वर महाप्रभु स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज के कृपा पात्र शिष्यों में से एक श्री श्रद्धा महाराज जी ने तीन दिवसीय श्री राम कथा के दौरान भक्तों को भगवान राम के जीवन और आदर्शों के बारे में बताया।
कथा में उपस्थित भक्तों को बताया गया कि आज का दिन अत्यंत पावन और शुभ है। यह दिन केवल एक त्यौहार नहीं बल्कि धर्म, मर्यादा, सत्य और आदर्श जीवन की प्रेरणा का प्रतीक है। श्री रामनवमी के अवसर पर श्रद्धालु परंपरागत तरीके से हर्षोल्लास के साथ भगवान श्री राम का जन्मोत्सव मनाते हैं।
परमहंस आश्रम, बख्तियारपुर, पटना, बिहार से आए स्वामी श्रद्धा महाराज जी ने विस्तार से बताया कि भगवान राम की महत्ता और राम तथा रावण का संघर्ष प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में चलता है। जब भाविकों के जन्म-जन्मांतर के संस्कार फलित होते हैं, तब समय के महापुरुषों की कृपा से हृदय में योग जागृत होता है। इसी योग के माध्यम से हृदय के भीतर रावण का नाश होता है और भगवान राम का राज्याभिषेक संभव होता है।
श्री श्रद्धा महाराज जी ने कहा, “रामराज बैठे त्रिलोका हर्षित भए गए सब शोका।” उन्होंने बताया कि योगियों के हृदय में रमन करने वाले भगवान राम के साथ साधना और ध्यान के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक भ्रांतियों का नाश स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज की यथार्थ गीता से ही संभव है।भक्तों को प्रेरित किया गया कि जब तक आत्मा का परमात्मा से साक्षात्कार नहीं हो जाता, तब तक समय के महापुरुषों के सानिध्य में चिंतन और भजन करते रहना चाहिए।
यह तीन दिवसीय श्री राम कथा 26 मार्च से 28 मार्च तक आयोजित की जा रही है। आयोजन में अधिक से अधिक लोग भाग लेकर भगवान श्री राम के जन्मदिवस की कथा का श्रवण कर पुण्य के भागी बन सकते हैं।