नई दिल्ली :- टेलीविजन दर्शक मापन प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने टीवी रेटिंग पॉलिसी (TRP) 2026 को अधिसूचित कर दिया है। इस नई नीति के लागू होने के साथ ही टीवी रेटिंग सिस्टम में कई बड़े बदलाव किए गए हैं, जिनका सीधा असर चैनलों और विज्ञापन बाजार पर पड़ेगा।
‘लैंडिंग पेज व्यूअरशिप’ को रेटिंग से हटाया
नई नीति के तहत एक अहम फैसला लेते हुए ‘लैंडिंग पेज व्यूअरशिप’ को TRP मापन से बाहर कर दिया गया है। अब इसे केवल मार्केटिंग टूल के रूप में ही इस्तेमाल किया जा सकेगा। माना जा रहा है कि इस कदम से कृत्रिम तरीके से बढ़ाई जाने वाली व्यूअरशिप पर रोक लगेगी।
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सख्त नियम
सरकार ने रेटिंग एजेंसियों के लिए अपनी कार्यप्रणाली (Methodology) सार्वजनिक करना अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही, डेटा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एजेंसियों को DPDP (डेटा प्रोटेक्शन) मानकों का पालन करना होगा, जिससे दर्शकों के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
ड्यूल-ऑडिट सिस्टम से बढ़ेगी सटीकता
नई TRP नीति में ड्यूल-ऑडिट सिस्टम लागू करने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत रेटिंग डेटा का दो स्तरों पर ऑडिट होगा, जिससे आंकड़ों की विश्वसनीयता और सटीकता को और मजबूत किया जा सकेगा। साथ ही, बड़े सैंपल साइज के जरिए डेटा को अधिक प्रतिनिधिक बनाने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं।
नई एजेंसियों को मिलेगा मौका
सरकार ने इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए रेटिंग एजेंसियों की न्यूनतम नेट वर्थ की शर्त को 20 करोड़ रुपये से घटाकर 5 करोड़ रुपये कर दिया है। इससे अधिक कंपनियों को इस सेक्टर में प्रवेश का अवसर मिलेगा और सिस्टम में विविधता आएगी।
क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि नई TRP नीति से टीवी उद्योग में फर्जी या कृत्रिम TRP के खेल पर लगाम लगेगी और विज्ञापनदाताओं को अधिक भरोसेमंद डेटा मिल सकेगा।सरकार की यह नई पहल टीवी रेटिंग सिस्टम में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में इससे मीडिया इंडस्ट्री में भरोसा बढ़ने के साथ-साथ प्रतिस्पर्धा भी तेज होने की उम्मीद है।