नई दिल्ली :- स्ट्रेट जल डमरू मध्य को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है जहां ईरान की संसद ने इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने के नियम तय कर दिए हैं। यह फैसला ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री लाइनों में गिना जाता है क्योंकि यहीं से वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है। खाड़ी देशों से निकलने वाला कच्चा तेल इसी रास्ते से एशिया यूरोप और अन्य देशों तक पहुंचता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का प्रतिबंध या अतिरिक्त शुल्क सीधे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जहाजों पर टोल लगाया जाता है तो सबसे पहले शिपिंग लागत बढ़ेगी। इसका असर तेल की कीमतों पर पड़ेगा और पेट्रोल डीजल से लेकर रोजमर्रा की चीजों तक महंगाई बढ़ सकती है। भारत जैसे देशों पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है क्योंकि यहां बड़ी मात्रा में तेल आयात किया जाता है।
ईरान का यह कदम मौजूदा कॉन्फ्लिक्ट के बीच रणनीतिक दबाव बनाने के तौर पर भी देखा जा रहा है। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो इस मार्ग पर आवाजाही और ज्यादा प्रभावित हो सकती है जिससे सप्लाई चेन पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस फैसले पर नजर बनाए हुए है क्योंकि यह केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
कुल मिलाकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टोल लगाने का फैसला आने वाले दिनों में वैश्विक बाजार तेल की कीमतों और आर्थिक स्थिरता पर बड़ा असर डाल सकता है।