लखनऊ (उत्तर प्रदेश):- पुलिस में दर्ज होने वाली एफआईआर प्रक्रिया को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। डीजीपी राजीव कृष्ण ने नए निर्देश जारी करते हुए साफ किया है कि अब हर शिकायत पर सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी।
नए आदेश के अनुसार कई मामलों में पहले प्रारंभिक जांच की जाएगी और उसके बाद ही यह तय होगा कि एफआईआर दर्ज की जाए या नहीं। पुलिस का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य फर्जी और गैर जरूरी मामलों को रोकना है जिससे जांच प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सके।
अधिकारियों के मुताबिक कई बार छोटी शिकायतों या आपसी विवादों को भी सीधे एफआईआर में बदल दिया जाता है जिससे सिस्टम पर अनावश्यक दबाव बढ़ता है। अब ऐसे मामलों में पहले सत्यापन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर ही कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
हालांकि इस फैसले को लेकर अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे पुलिस के काम को व्यवस्थित करने की दिशा में सही कदम मान रहे हैं वहीं कुछ का कहना है कि इससे आम लोगों के लिए न्याय पाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव का असर आम जनता पर सीधे पड़ेगा इसलिए इसके क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी होगी। यदि सही तरीके से लागू किया गया तो यह व्यवस्था को बेहतर बना सकता है लेकिन लापरवाही की स्थिति में लोगों को परेशानी भी हो सकती है।
कुल मिलाकर यह फैसला यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है जिसका असर आने वाले समय में साफ नजर आएगा।