नई दिल्ली :- नए साल की शुरुआत के साथ ही एक जनवरी दो हजार छब्बीस से देश में कई अहम नियम लागू हो गए हैं जिनका सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और जेब पर पड़ने वाला है। सरकार की ओर से किए गए इन बदलावों में कर्मचारियों पेंशनभोगियों और आम उपभोक्ताओं से जुड़े फैसले शामिल हैं जो आने वाले समय में आर्थिक संतुलन को प्रभावित करेंगे।
सबसे बड़ा बदलाव आठवें वेतन आयोग को लेकर हुआ है। इसके लागू होने से केंद्र सरकार के करीब पचास लाख कर्मचारियों और उनहत्तर लाख पेंशनभोगियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। वेतन और पेंशन में बढ़ोतरी से कर्मचारियों की क्रय शक्ति बढ़ेगी और बाजार में मांग को भी बल मिलेगा। लंबे समय से वेतन आयोग की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों के लिए यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है।
ऊर्जा क्षेत्र में भी नए साल पर बदलाव देखने को मिला है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दामों में बढ़ोतरी की गई है जिससे होटल ढाबा और छोटे कारोबारियों पर बोझ बढ़ सकता है। इसका असर खाने पीने की चीजों की कीमतों पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। वहीं दूसरी ओर सीएनजी और पीएनजी के दाम सस्ते किए गए हैं जिससे वाहन चालकों और घरेलू उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है।
इन बदलावों का असर शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में महसूस किया जाएगा। जहां वेतन आयोग से नौकरीपेशा वर्ग को फायदा होगा वहीं गैस की कीमतों में बदलाव से व्यापार और घरेलू बजट प्रभावित होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इन फैसलों से अर्थव्यवस्था में मिश्रित प्रभाव देखने को मिल सकता है।
सरकार का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य संतुलन बनाए रखना और जरूरतमंद वर्गों को राहत देना है। हालांकि आम आदमी के लिए यह बदलाव फायदे और नुकसान दोनों लेकर आए हैं। नए नियमों के लागू होने के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले महीनों में इसका असर महंगाई और जीवन स्तर पर किस तरह दिखाई देगा।