Study दिल्ली:- एक नए अध्ययन के अनुसार बुजुर्गों में कमजोरी और अवसाद एक साथ डिमेंशिया के खतरे को 17% तक बढ़ा सकते हैं। यह अध्ययन जनरल साइकियाट्री जर्नल में प्रकाशित हुआ है और इसमें 2 लाख से अधिक लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है।
अध्ययन के अनुसार, कमजोरी वाले बुजुर्गों में डिमेंशिया का खतरा 2.5 गुना अधिक होता है, जबकि अवसाद वाले बुजुर्गों में यह खतरा 60% अधिक होता है। लेकिन जब कमजोरी और अवसाद दोनों एक साथ होते हैं तो डिमेंशिया का खतरा तीन गुना अधिक हो जाता है। अध्ययन के लेखकों का कहना है कि कमजोरी और अवसाद दोनों ही डिमेंशिया के खतरे को बढ़ाते हैं लेकिन जब दोनों एक साथ होते हैं तो यह खतरा और भी अधिक हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि कमजोरी और अवसाद को नियंत्रित करके डिमेंशिया के खतरे को कम किया जा सकता है ।
क्या हैं कमजोरी और अवसाद के लक्षण?
– कमजोरी: वजन कम होना, थकान, कमजोर मांसपेशियां
– अवसाद: उदासी, रुचि की कमी, नींद की कमी
क्या किया जा सकता है?
– नियमित व्यायाम करें
– संतुलित आहार लें
– तनाव कम करें
– डॉक्टर से परामर्श लें