नई दिल्ली :- पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान से एक बड़ा राजनीतिक संदेश सामने आया है जिसने दक्षिण एशिया की राजनीति में हलचल मचा दी है। बलूच नेता मीर यार बलूच ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को एक खुला पत्र लिखकर साफ शब्दों में कहा है कि बलूचिस्तान के लोग भारत के साथ खड़े हैं और पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस पत्र में उन्होंने पाकिस्तान को उखाड़ फेंकने जैसी तीखी भाषा का इस्तेमाल करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की है।
मीर यार बलूच ने पत्र में कहा है कि बलूचिस्तान लंबे समय से मानवाधिकार हनन का शिकार है। पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा एजेंसियां वहां के लोगों पर अत्याचार कर रही हैं। जबरन गुमशुदगी हत्या और संसाधनों की लूट आम बात बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इन मुद्दों को दबाया जा रहा है और बलूच जनता की आवाज को सुनने से इनकार किया जा रहा है।
पत्र में चीन और पाकिस्तान के रिश्तों पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। मीर यार बलूच के अनुसार चीन पाकिस्तान के साथ मिलकर बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि आने वाले समय में चीन अपनी सेना भी पाकिस्तान में तैनात कर सकता है जिससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा पर खतरा बढ़ जाएगा। उन्होंने इसे न केवल बलूचिस्तान बल्कि पूरे एशिया के लिए चिंता का विषय बताया।
भारत की भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत लोकतंत्र मानवाधिकार और न्याय की बात करता है। बलूच नेता ने उम्मीद जताई कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बलूचिस्तान के मुद्दे को मजबूती से उठाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि बलूच जनता भारत को एक नैतिक समर्थन देने वाले देश के रूप में देखती है।
यह खुला पत्र ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान पहले से ही आंतरिक अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय दबाव से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पत्र से पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं और बलूचिस्तान का मुद्दा एक बार फिर वैश्विक बहस का हिस्सा बन सकता है।