नई दिल्ली :- इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज जो रूट ने एक बार फिर अपनी क्लास और निरंतरता से क्रिकेट जगत को प्रभावित किया है। एशेज सीरीज के पांचवें और अंतिम टेस्ट मैच में रूट ने शानदार शतकीय पारी खेलते हुए ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज बल्लेबाज रिकी पोंटिंग के बड़े रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। यह शतक उनके टेस्ट करियर का 41वां शतक रहा जिसने उन्हें टेस्ट क्रिकेट इतिहास में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाजों की सूची में संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर पहुंचा दिया है।
जो रूट की यह पारी केवल एक आंकड़ा नहीं बल्कि उनकी तकनीक धैर्य और मानसिक मजबूती का प्रमाण है। एशेज जैसे दबाव भरे मुकाबले में शतक लगाना हर खिलाड़ी के लिए आसान नहीं होता लेकिन रूट ने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन संतुलन दिखाया। उन्होंने गेंदबाजों की रणनीति को समझते हुए लंबे समय तक क्रीज पर टिककर रन बनाए और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।
रिकी पोंटिंग जैसे महान बल्लेबाज के रिकॉर्ड की बराबरी करना किसी भी खिलाड़ी के लिए गर्व की बात होती है। पोंटिंग लंबे समय तक ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट की पहचान रहे हैं और उनके नाम दर्ज रिकॉर्ड को छूना भी बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। अब जो रूट की नजरें भारतीय क्रिकेट के महानायक सचिन तेंदुलकर के टेस्ट शतकों के रिकॉर्ड पर टिकी हैं। हालांकि यह राह आसान नहीं है लेकिन रूट की मौजूदा फॉर्म और फिटनेस को देखते हुए यह लक्ष्य असंभव भी नहीं लगता।
क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि जो रूट आधुनिक टेस्ट क्रिकेट के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने अलग अलग परिस्थितियों में रन बनाकर अपनी उपयोगिता साबित की है। चाहे घरेलू मैदान हो या विदेशी पिच रूट का बल्ला हर जगह बोलता नजर आया है।
जो रूट का यह शतक केवल इंग्लैंड के लिए नहीं बल्कि टेस्ट क्रिकेट के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है। यह दिखाता है कि टी ट्वेंटी और सीमित ओवरों के दौर में भी टेस्ट क्रिकेट की चमक और महत्व बरकरार है। आने वाले समय में क्रिकेट प्रशंसकों को रूट से और भी ऐतिहासिक पारियों की उम्मीद रहेगी।