नई दिल्ली :- भारतीय सेना ने अग्निवीर योजना के तहत भर्ती युवाओं को लेकर एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है। सेना ने स्पष्ट कर दिया है कि जो अग्निवीर भविष्य में स्थायी सेवा में शामिल होने की इच्छा रखते हैं उन्हें सेवा अवधि के दौरान तय नियमों का पूरी तरह पालन करना होगा। इनमें सबसे अहम शर्त विवाह से जुड़ी बताई जा रही है। नियमों का उल्लंघन करने वाले अग्निवीरों को स्थायी चयन की दौड़ से बाहर किया जा सकता है।
सेना के अधिकारियों के अनुसार अग्निवीर योजना का उद्देश्य अनुशासन प्रशिक्षण और राष्ट्र सेवा की भावना को प्राथमिकता देना है। चार साल की सेवा अवधि के दौरान अग्निवीरों से पूरी निष्ठा और फोकस की अपेक्षा की जाती है। इसी कारण यह स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि यदि कोई अग्निवीर स्थायी भर्ती का इच्छुक है तो उसे तय अवधि में विवाह से बचना होगा। ऐसा न करने पर उसके मूल्यांकन पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
सूत्रों का कहना है कि स्थायी सेवा के लिए चुने जाने वाले अग्निवीरों का चयन प्रदर्शन अनुशासन और नियमों के पालन के आधार पर किया जाएगा। सेना का मानना है कि शुरुआती सेवा काल में पारिवारिक जिम्मेदारियां सैनिक के प्रशिक्षण और तैनाती को प्रभावित कर सकती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए यह शर्त रखी गई है।
इस फैसले के बाद युवाओं के बीच मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ अग्निवीर इसे अनुशासन और करियर के लिहाज से जरूरी मान रहे हैं। वहीं कुछ युवाओं का कहना है कि व्यक्तिगत जीवन से जुड़े फैसलों पर इतनी सख्ती उचित नहीं है। हालांकि सेना का रुख साफ है कि यह निर्णय किसी को रोकने के लिए नहीं बल्कि बेहतर और समर्पित सैनिक तैयार करने के लिए लिया गया है।
सेना ने यह भी कहा है कि अग्निवीरों को पहले से सभी नियमों की जानकारी दी जाती है। स्थायी सेवा का अवसर सीमित होता है और इसके लिए सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवारों का चयन किया जाता है। जो अग्निवीर नियमों का पालन करेंगे और उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे उन्हें ही आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।
यह फैसला अग्निवीर योजना के तहत सेवा कर रहे युवाओं के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि यदि लक्ष्य स्थायी सेना में शामिल होना है तो प्राथमिकता केवल राष्ट्र सेवा और अनुशासन को देनी होगी।