नई दिल्ली :- केंद्र सरकार ने एंटीबायोटिक दवाओं के सही पहचान और इनके गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। एंटीबायोटिक दवाओं के रैपर या पैकेजिंग पर विशेष पहचान चिह्न रंग कोड या संकेत लगाने की योजना बनाई जा रही है जिससे आम जनता और फार्मेसिस्ट आसानी से यह समझ सकें कि वह दवा एंटीबायोटिक है या नहीं और उसे बिना डॉक्टर की सलाह के न लिया जाए। यह कदम खासकर उस भ्रम को दूर करने के लिए उठाया गया है जहाँ लोग सामान्य दवा और एंटीबायोटिक दवा में अंतर नहीं समझ पाते हैं जिसके कारण सही सलाह के बिना ही दवा का सेवन बढ़ रहा है।
सरकार ने सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) से इस दिशा में दिशा-निर्देश जारी करने को कहा है और पैकेजिंग पर विशेष कोड, रंग संकेत, QR कोड या अल्फान्यूमेरिक मार्किंग लगाने पर विचार हो रहा है ताकि दवा की श्रेणी आसान तरीके से पहचान में आ सके। इससे मरीजों को दवा का इस्तेमाल समझदारी से करने में मदद मिलेगी और गलत उपयोग कम होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एंटीबायोटिक दवाओं के बढ़ते उपयोग को राष्ट्रीय स्वास्थ्य समस्या के रूप में देखा है और लोगों से अपील की है कि वे इन दवाओं का सेवन जरूरत पड़ने पर ही करें और डॉक्टर की सलाह के बिना न लें। इसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए सरकार राष्ट्रीय जागरूकता अभियान भी शुरू करने जा रही है ताकि जनता एंटीबायोटिक प्रतिरोध जैसे गंभीर स्वास्थ्य संकट को समझ सके और आवश्यक सावधानियाँ अपनाए।
इस फैसले का मकसद एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) के बढ़ते खतरे से निपटना है जो तब बढ़ता है जब लोग बिना विशेषज्ञ सलाह के दोबारा से या जरूरत से अधिक एंटीबायोटिक लेते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इससे बैक्टीरिया दवाओं के प्रति प्रतिरोधक बन जाते हैं और इसका असर स्वास्थ्य पर गंभीर रूप से पड़ता है। ऐसे में दवाओं की पहचान और जागरूकता बढ़ाने के कदम से सही उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और स्वास्थ्य प्रणाली पर पड़ने वाला बोझ भी कम होगा।
सरकार की यह पहल स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अहम मानी जा रही है क्योंकि इससे दवाओं के उपयोग में अनुशासन आएगा और आम लोगों को अपने उपचार को लेकर वैज्ञानिक निर्णय लेने में मदद मिलेगी।