Drug Violation दिल्ली:- भारत के केंद्रीय दवा नियामक केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने छोटे-मोटे उल्लंघनों के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं जिससे दवा निर्माताओं और वितरकों को अदालत के बाहर अपने मामलों को निपटाने में मदद मिलेगी। यह दिशानिर्देश ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स (कंपाउंडिंग ऑफ ऑफेंसेज) रूल्स, 2025 के तहत जारी किए गए हैं, जो जैन विश्वास अधिनियम के तहत लाए गए हैं।
क्या है कंपाउंडिंग ऑफ ऑफेंसेज?
कंपाउंडिंग ऑफ ऑफेंसेज एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें दवा निर्माताओं और वितरकों को अदालत के बाहर अपने मामलों को निपटाने की अनुमति दी जाती है बशर्ते वे उल्लंघन की गंभीरता के अनुसार जुर्माना भरें और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करें। यह प्रक्रिया छोटे-मोटे उल्लंघनों के लिए है जैसे कि दस्तावेजीकरण में त्रुटियां या लेबलिंग में गलतियां।
दिशानिर्देशों के मुख्य बिंदु
– कंपाउंडिंग ऑफ ऑफेंसेज के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी।
– कंपाउंडिंग ऑथोरिटी की भूमिका और शक्तियां।
– जुर्माना और सुधारात्मक कार्रवाई की जानकारी।
– कंपाउंडिंग ऑफ ऑफेंसेज के लिए आवश्यक शर्तें और प्रतिबंध।
यह कैसे मदद करेगा?
यह दिशानिर्देश दवा निर्माताओं और वितरकों को अदालत के बाहर अपने मामलों को निपटाने में मदद करेगा, जिससे उन्हें समय और धन की बचत होगी। साथ ही यह प्रक्रिया दवा उद्योग में सुधारात्मक कार्रवाई को बढ़ावा देगी और सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।