नई दिल्ली :- शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में सामने आए एक प्रश्न पत्र ने छात्रों अभिभावकों और शिक्षकों सभी को हैरान कर दिया। परीक्षा के प्रश्न पत्र में पूछा गया सवाल था मोना के कुत्ते का क्या नाम है और इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि विकल्पों में एक नाम राम भी शामिल था। इस अजीबोगरीब सवाल के सामने आते ही शिक्षा विभाग के कारनामों पर बवाल मच गया।
छात्रों का कहना है कि परीक्षा का उद्देश्य ज्ञान और समझ का मूल्यांकन करना होता है लेकिन ऐसे सवाल न तो पाठ्यक्रम से जुड़े होते हैं और न ही किसी तरह की शैक्षणिक सोच को बढ़ावा देते हैं। अभिभावकों ने भी नाराजगी जताते हुए कहा कि बच्चे दिन रात मेहनत करके पढ़ाई करते हैं और परीक्षा में इस तरह के निरर्थक सवाल पूछे जाते हैं तो यह उनके भविष्य के साथ मजाक है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रश्न यह दर्शाते हैं कि प्रश्न पत्र तैयार करने की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती गई है। न तो विषय की गहराई पर ध्यान दिया गया और न ही भाषा और संदर्भ की मर्यादा का ख्याल रखा गया। विकल्पों में राम जैसे नाम का इस्तेमाल भी संवेदनशीलता के लिहाज से अनुचित बताया जा रहा है।
मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने सफाई देते हुए कहा है कि यह एक मानवीय भूल हो सकती है और इसकी जांच कराई जाएगी। विभाग ने यह भी आश्वासन दिया है कि भविष्य में प्रश्न पत्रों की जांच प्रक्रिया को और सख्त किया जाएगा ताकि ऐसी गलती दोबारा न हो। हालांकि इस बयान से लोगों की नाराजगी पूरी तरह शांत नहीं हुई है।
सोशल मीडिया पर भी इस सवाल को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोग शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर तंज कस रहे हैं और जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो शिक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर असर पड़ेगा।
कुल मिलाकर एक छोटे से सवाल ने पूरे सिस्टम की खामियों को उजागर कर दिया है और अब सबकी नजर इस बात पर है कि शिक्षा विभाग इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है।