नई दिल्ली :- लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं और 145 लोगों की मौत के बाद आखिरकार सरकार हरकत में आ गई है। स्लीपर कोच बसों को लेकर अब सख्त नियम लागू कर दिए गए हैं। इन बसों में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे लेकिन हालिया हादसों ने प्रशासन को ठोस कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया।
सरकार के अनुसार कई दुर्घटनाओं में यह सामने आया कि स्लीपर कोच बसों की बनावट और उनमें सुरक्षा मानकों की कमी जानलेवा साबित हुई। तेज रफ्तार बसों में सीट बेल्ट का अभाव, आपातकालीन निकास की कमी और ड्राइवरों की लापरवाही प्रमुख कारण रहे। अब नए नियमों के तहत इन सभी पहलुओं पर सख्ती से अमल कराया जाएगा।
नए दिशा निर्देशों के अनुसार स्लीपर कोच बसों में अब अनिवार्य रूप से सीट बेल्ट लगानी होगी। बस की अधिकतम गति सीमा तय की गई है और स्पीड गवर्नर लगाना जरूरी कर दिया गया है। इसके अलावा ड्राइवरों के लिए कार्य घंटे सीमित किए गए हैं ताकि थकान के कारण होने वाले हादसों को रोका जा सके। बसों में अग्निशमन यंत्र और आपातकालीन दरवाजे भी अनिवार्य होंगे।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाली बस कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। भारी जुर्माने के साथ साथ परमिट रद्द करने तक का प्रावधान रखा गया है। परिवहन विभाग को नियमित जांच के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी तरह की लापरवाही को समय रहते पकड़ा जा सके।
यात्रियों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि स्लीपर कोच बसें लंबी दूरी की यात्रा के लिए सुविधाजनक तो होती हैं लेकिन सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन नियमों का सही तरीके से पालन हुआ तो सड़क हादसों में बड़ी कमी आ सकती है।
कुल मिलाकर 145 जानों की कीमत पर लिया गया यह फैसला भविष्य में कई जिंदगियां बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है। अब असली चुनौती इन नियमों को कागजों से निकालकर जमीन पर लागू करने की है।