नई दिल्ली :- दिल्ली एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। अब इस समस्या से निपटने के लिए हरियाणा सरकार ने एक बड़ी और दूरगामी पहल की है। फरीदाबाद से शुरू हुई इको वन परियोजना का उद्देश्य न केवल प्रदूषण कम करना है बल्कि लोगों को प्रकृति से दोबारा जोड़ना भी है। इस योजना के तहत अनुपयोगी और खाली पड़ी सरकारी भूमि को छोटे जंगलों यानी मिनी फॉरेस्ट में बदला जा रहा है।
इको वन परियोजना को पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी का अनूठा मॉडल माना जा रहा है। इसमें बच्चों महिलाओं और बुजुर्गों को सक्रिय रूप से शामिल किया जा रहा है ताकि हर वर्ग प्रकृति के साथ जुड़ सके। स्कूलों के छात्र पौधारोपण और देखभाल में भाग ले रहे हैं जबकि स्थानीय महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक भी इन हरित क्षेत्रों की निगरानी और संरक्षण में योगदान दे रहे हैं।
सरकार का मानना है कि शहरी इलाकों में छोटे लेकिन घने जंगल वायु गुणवत्ता सुधारने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। ये मिनी फॉरेस्ट न केवल कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करेंगे बल्कि तापमान को नियंत्रित करने और जैव विविधता बढ़ाने में भी मदद करेंगे। पक्षियों और छोटे जीवों के लिए यह नए आश्रय स्थल बनेंगे जिससे प्राकृतिक संतुलन को बल मिलेगा।
फरीदाबाद में इस परियोजना की शुरुआत के बाद आने वाले समय में इसे पूरे हरियाणा और दिल्ली एनसीआर के अन्य हिस्सों में भी लागू करने की योजना है। प्रशासन का कहना है कि अगर यह मॉडल सफल रहता है तो यह देश के अन्य प्रदूषित शहरों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि केवल नियम और प्रतिबंध ही नहीं बल्कि ऐसे सकारात्मक प्रयास ही लंबे समय में प्रदूषण की समस्या का समाधान दे सकते हैं। इको वन परियोजना से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले वर्षों में दिल्ली एनसीआर की हवा साफ होगी और लोग एक स्वस्थ पर्यावरण में सांस ले सकेंगे।