पंद्रह जनवरी को मकर संक्रांति का पर्व ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व

जौनपुर (उत्तर प्रदेश):- ज्योतिष पंडित सुरेश कुमार पांडे निजी ग्राम रामदेवपुर चंदवक जौनपुर के अनुसार ग्रहों के राजा सूर्य पंद्रह जनवरी को धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। सूर्य के इस राशि परिवर्तन के साथ ही मकर संक्रांति का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह दिन सनातन परंपरा में अत्यंत शुभ माना जाता है और इसका धार्मिक तथा ज्योतिषीय महत्व विशेष होता है।

ज्योतिषीय गणना के अनुसार अब वर्ष दो हजार अस्सी तक मकर संक्रांति हर साल पंद्रह जनवरी को ही मनाई जाएगी। इसके बाद सूर्य के राशि परिवर्तन में एक दिन की वृद्धि हो जाएगी और तब मकर संक्रांति सोलह जनवरी को पड़ेगी। इस वर्ष सूर्य का राशि परिवर्तन रात्रि नौ बजकर अड़तीस मिनट पर होगा। इसी क्षण से खरवास की समाप्ति मानी जाएगी और सभी मांगलिक कार्य जैसे विवाह गृह प्रवेश और अन्य शुभ संस्कार पुनः आरंभ हो जाएंगे।

 

इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व गुरुवार के दिन शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि में मनाया जाएगा। इस दौरान वृद्धि योग का संयोग बन रहा है और जेष्ठा नक्षत्र भी प्रभावी रहेगा। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार यह संयोग अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है और इस दिन किए गए दान पुण्य का विशेष महत्व होता है।

शास्त्रों में उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन कहा गया है जबकि दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि माना जाता है। मकर संक्रांति के साथ ही सूर्य उत्तरायण होते हैं जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। इसी कारण इस दिन स्नान दान और जप तप का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन साधारण नदी में स्नान करने से भी वही पुण्य प्राप्त होता है जो गंगा स्नान से मिलता है। इसलिए यह पर्व आस्था विश्वास और आत्मशुद्धि का प्रतीक माना जाता है।

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