हिसार (हरियाणा):- हरियाणा के हिसार जिले से सामने आई यह घटना समाज को झकझोरने वाली है। खासा महाजनान गांव में श्मशान घाट के भीतर अनुसूचित जाति के लोगों के लिए अलग श्मशान बनाए जाने का मामला उजागर हुआ है। जिस स्थान को अंतिम संस्कार और समानता का प्रतीक माना जाता है वहां भी जातिगत भेदभाव देखने को मिलना बेहद चिंताजनक है। इस मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन से दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
ग्रामीणों के अनुसार गांव के श्मशान घाट में लंबे समय से अलग व्यवस्था चली आ रही थी। अनुसूचित जाति के लोगों को मुख्य श्मशान में अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं दी जाती थी। इसके लिए एक अलग स्थान निर्धारित किया गया था। पीड़ित समुदाय का कहना है कि कई बार विरोध करने के बावजूद उनकी बात नहीं सुनी गई। सामाजिक दबाव और डर के कारण लोग चुप रहने को मजबूर थे।
यह मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। मानवाधिकार आयोग ने इसे गंभीर सामाजिक अपराध मानते हुए स्पष्ट किया है कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है। मृत्यु के बाद भी किसी तरह का भेदभाव मानव गरिमा का उल्लंघन है। आयोग ने जिला प्रशासन से यह भी पूछा है कि अब तक इस मामले में क्या कार्रवाई की गई और दोषियों के खिलाफ क्या कदम उठाए गए।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह घटना दिखाती है कि आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में जातिगत सोच कितनी गहरी है। कानून और शिक्षा के बावजूद ऐसी मानसिकता का बने रहना विकास पर सवाल खड़े करता है। उनका मानना है कि सिर्फ जांच ही नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता और सख्त कार्रवाई भी जरूरी है।
गांव के कुछ लोगों का कहना है कि परंपरा के नाम पर ऐसी व्यवस्थाएं चलाई जा रही थीं। हालांकि बदलते समय में इस सोच को चुनौती मिल रही है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी और किसी भी तरह के भेदभाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि समानता की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति को भी बराबरी का सम्मान नहीं मिलेगा तब तक ऐसे मुद्दे सामने आते रहेंगे।