मुंबई (महाराष्ट्र):- महाराष्ट्र की नगर निगम चुनावों की मतगणना के बीच पुणे और पिंपरी चिंचवड़ से जो संकेत सामने आ रहे हैं वे राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं। शुरुआती रुझानों में भारतीय जनता पार्टी ने इन दोनों प्रमुख शहरी क्षेत्रों में मजबूत बढ़त बनाकर सभी को चौंका दिया है। लंबे समय से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का प्रभाव माने जाने वाले इन इलाकों में चाचा भतीजे की जोड़ी कमजोर पड़ती नजर आ रही है।
पुणे को हमेशा से शरद पवार का राजनीतिक गढ़ माना जाता रहा है। वहीं पिंपरी चिंचवड़ में अजीत पवार की पकड़ को भी मजबूत समझा जाता था। लेकिन इस बार मतदाताओं का रुख कुछ अलग दिखाई दे रहा है। विकास के मुद्दे शहरी सुविधाएं और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे सवालों ने चुनावी समीकरण बदल दिए हैं। भाजपा ने स्थानीय स्तर पर मजबूत संगठन और आक्रामक प्रचार के जरिए मतदाताओं को साधने में सफलता पाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी मतदाता अब परंपरागत नेताओं से ज्यादा ठोस काम और भविष्य की योजनाओं पर भरोसा जता रहे हैं। भाजपा ने स्मार्ट सिटी परियोजनाओं बुनियादी ढांचे के विकास और ट्रैफिक जलभराव जैसी समस्याओं के समाधान को अपने अभियान का केंद्र बनाया। इसका सीधा असर वोटिंग पैटर्न पर पड़ा।
दूसरी ओर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भीतर अंदरूनी खींचतान और नेतृत्व को लेकर असमंजस भी नुकसानदायक साबित होता दिख रहा है। चाचा भतीजे के बीच राजनीतिक मतभेदों की चर्चाएं चुनाव से पहले ही माहौल बना चुकी थीं। इसका असर कार्यकर्ताओं और समर्थकों की एकजुटता पर पड़ा।
अगर यही रुझान अंतिम नतीजों में बदलते हैं तो यह सिर्फ दो नगर निगमों की हार जीत नहीं होगी बल्कि महाराष्ट्र की शहरी राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत मानी जाएगी। यह संकेत भी मिलेगा कि आने वाले समय में सत्ता की राजनीति में पुराने गढ़ भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं और मतदाता बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार हैं।