नई दिल्ली :- प्रवर्तन निदेशालय ने आठ साल बाद एक अहम दावा करते हुए कहा है कि भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी के साथ उसका बेटा भी मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों में शामिल था। जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था बल्कि पूरे परिवार और उससे जुड़े कारोबारी नेटवर्क के जरिए अवैध धन को छिपाने और विदेश भेजने की साजिश रची गई थी। ईडी का कहना है कि चोकसी के बेटे ने कई शेल कंपनियों के माध्यम से संदिग्ध लेनदेन को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई।
जांच में सामने आया है कि पीएनबी घोटाले से जुड़े पैसों को अलग अलग खातों में घुमाया गया ताकि असली स्रोत को छिपाया जा सके। ईडी के अनुसार इन लेनदेन में विदेशी बैंक खाते और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। चोकसी का बेटा इन कंपनियों का निदेशक या लाभार्थी बताया जा रहा है जिससे जांच का दायरा और बढ़ गया है।
ईडी अधिकारियों का कहना है कि पहले चरण की जांच में कई अहम कड़ियां सामने नहीं आ सकी थीं। समय के साथ नए सबूत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए दस्तावेज मिले जिनसे यह साफ हुआ कि मनी लॉन्ड्रिंग की योजना सुनियोजित थी। एजेंसी का दावा है कि अवैध धन का इस्तेमाल संपत्ति खरीदने और विदेशों में निवेश करने के लिए किया गया।
इस खुलासे के बाद मामले में कानूनी कार्रवाई तेज होने की संभावना है। ईडी संबंधित संपत्तियों को जब्त करने की तैयारी में है और विदेशी एजेंसियों से प्रत्यर्पण प्रक्रिया पर भी विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दावा भारत में आर्थिक अपराधों के खिलाफ सख्त रुख को दर्शाता है।
मेहुल चोकसी का यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है और आने वाले दिनों में जांच से जुड़े और भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।