नई दिल्ली :- दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सरकार अब सख्त और दीर्घकालिक रणनीति पर काम कर रही है। राजधानी की हवा को साफ बनाने के लिए एक मास्टर प्लान तैयार किया गया है जिसमें गाड़ियों से लेकर सार्वजनिक परिवहन और शहरी ढांचे तक बड़े बदलाव शामिल हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हाल ही में इस योजना की समीक्षा की और संबंधित विभागों को तय समयसीमा में लक्ष्य पूरे करने के निर्देश दिए।
सरकार का सबसे बड़ा फोकस दिल्ली की सड़कों पर चलने वाले वाहनों पर है। योजना के तहत वर्ष 2029 तक राजधानी में 14000 इलेक्ट्रिक बसें उतारने का लक्ष्य रखा गया है। इससे सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के साथ साथ प्रदूषण में भी बड़ी कमी आने की उम्मीद है। इसके अलावा नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत दो पहिया और चार पहिया वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलने के लिए लोगों को प्रोत्साहन दिया जाएगा। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को भी तेजी से बढ़ाया जाएगा ताकि ईवी अपनाने में कोई दिक्कत न हो।
मास्टर प्लान में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार को भी अहम हिस्सा बनाया गया है। नई लाइनों और स्टेशनों के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को निजी गाड़ियों के बजाय सार्वजनिक परिवहन की ओर लाने की कोशिश की जाएगी। साथ ही राजधानी की सड़कों के पुनर्निर्माण और मरम्मत पर भी जोर दिया जाएगा ताकि धूल प्रदूषण को कम किया जा सके।
सरकार कचरा प्रबंधन को लेकर भी सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। लैंडफिल साइट्स को खत्म करने और कचरे के वैज्ञानिक निपटान की दिशा में काम तेज किया जाएगा। औद्योगिक इकाइयों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। इसके साथ ही बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाने की योजना है ताकि हरित आवरण बढ़ाया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह मास्टर प्लान जमीन पर सही तरीके से लागू होता है तो आने वाले वर्षों में दिल्ली की हवा में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि इसके लिए सरकार के साथ साथ आम लोगों का सहयोग भी जरूरी होगा। सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल कम प्रदूषण फैलाने वाली आदतें और पर्यावरण के प्रति जागरूकता ही इस योजना को सफल बना सकती है।