नई दिल्ली :- भारत और जापान के बीच रणनीतिक साझेदारी अब एक नए और निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुकी है। दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेमीकंडक्टर और सप्लाई चेन के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए एक नया मास्टरप्लान तैयार किया है। इस योजना का उद्देश्य तकनीकी आत्मनिर्भरता आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की चुनौतियों से मिलकर मुकाबला करना है।
इस मास्टरप्लान के तहत भारत और जापान मिलकर एआई आधारित तकनीकों के विकास पर काम करेंगे। स्वास्थ्य शिक्षा स्मार्ट सिटी रक्षा और उद्योग जैसे क्षेत्रों में एआई के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। जापान की उन्नत तकनीकी क्षमता और भारत की विशाल डिजिटल प्रतिभा को जोड़कर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी समाधान विकसित करने की योजना है। इससे दोनों देशों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र इस साझेदारी का एक अहम स्तंभ है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में चिप निर्माण और आपूर्ति को लेकर चुनौतियां सामने आई हैं। भारत और जापान ने मिलकर सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग रिसर्च और डिजाइन में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। भारत में उत्पादन इकाइयों की स्थापना और जापान की तकनीकी विशेषज्ञता के माध्यम से एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा। इससे दोनों देश आयात पर निर्भरता कम कर सकेंगे।
्सप्लाई चेन को सुरक्षित और लचीला बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया है। कोविड महामारी और वैश्विक तनावों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भरोसेमंद सप्लाई चेन कितनी जरूरी है। भारत और जापान मिलकर वैकल्पिक सप्लाई नेटवर्क विकसित करेंगे ताकि किसी एक देश या क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता न रहे। यह कदम एशिया प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता को भी मजबूती देगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया मास्टरप्लान केवल द्विपक्षीय सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक तकनीकी संतुलन को भी प्रभावित करेगा। भारत जापान साझेदारी भविष्य की तकनीक और सुरक्षित आपूर्ति व्यवस्था के लिए एक मजबूत आधार बनकर उभरेगी और दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।