आवारा कुत्तों पर बयान से बढ़ा विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने जताई सख्त नाराजगी

नई दिल्ली :- आवारा कुत्तों के मुद्दे पर की गई टिप्पणियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पशु अधिकारों से जुड़ी कार्यकर्ता और पूर्व मंत्री मेनका गांधी के बयानों पर सुनवाई के दौरान अदालत ने नाराजगी जाहिर की। न्यायालय ने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां न केवल भ्रम फैलाती हैं बल्कि अदालत की गरिमा को भी प्रभावित करती हैं।

 

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मेनका गांधी की ओर से पेश हुए वकील से तीखे सवाल पूछे। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि पहले से चल रहे मामलों पर सार्वजनिक मंच से टिप्पणी करना अनुचित है। न्यायाधीशों ने कहा कि जब कोई मामला न्यायालय के विचाराधीन हो तब ऐसे बयान देना अवमानना जैसी स्थिति पैदा कर सकता है।

 

कोर्ट ने यह भी कहा कि आवारा कुत्तों का मुद्दा संवेदनशील है और इससे आम जनता की सुरक्षा तथा पशु कल्याण दोनों जुड़े हुए हैं। ऐसे मामलों में संतुलित और जिम्मेदार भाषा का इस्तेमाल जरूरी है। अदालत ने यह संकेत दिया कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है।

 

वकील ने अदालत को भरोसा दिलाया कि आगे इस तरह की कोई टिप्पणी नहीं की जाएगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले पर कड़ी नजर रखेगा। कोर्ट ने दोहराया कि न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने वाली किसी भी कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

 

आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों में देश के कई हिस्सों से याचिकाएं दाखिल की गई हैं। कहीं लोगों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया है तो कहीं पशुओं के अधिकारों की बात कही गई है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि इस समस्या का समाधान कानून और वैज्ञानिक तरीके से होना चाहिए।

 

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट की यह सख्ती भविष्य में जिम्मेदार बयानबाजी की दिशा में एक स्पष्ट संदेश है। अदालत ने संकेत दिया है कि संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

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