वाशिंगटन (अमेरिका):- अमेरिका और चीन के बीच टकराव का एक नया मोर्चा खुलता नजर आ रहा है और इस बार विवाद की वजह मछली और समुद्री संसाधन बने हैं। अमेरिकी सांसदों की एक हालिया रिपोर्ट ने बीजिंग की चिंता बढ़ा दी है। इस रिपोर्ट में चीन पर अवैध मछली पकड़ने और समुद्री नियमों के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए गए हैं जिससे दोनों देशों के रिश्तों में फिर से तल्खी आने के संकेत मिल रहे हैं।
अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन दुनिया भर के समुद्री इलाकों में अपनी विशाल फिशिंग फ्लीट के जरिए जरूरत से ज्यादा मछली पकड़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन की यह गतिविधि न केवल समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा रही है बल्कि दूसरे देशों के मछुआरों की आजीविका पर भी सीधा असर डाल रही है। अमेरिका का कहना है कि यह एक रणनीतिक कदम है जिसके जरिए चीन वैश्विक खाद्य आपूर्ति और समुद्री संसाधनों पर नियंत्रण बढ़ाना चाहता है।
रिपोर्ट सामने आते ही ड्रैगन के भड़कने की वजह साफ है। चीन पहले से ही दक्षिण चीन सागर को लेकर कई देशों से विवाद में उलझा हुआ है। ऐसे में मछली पकड़ने के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया जाना उसे घेरने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। बीजिंग को आशंका है कि अमेरिका इस रिपोर्ट के आधार पर नए प्रतिबंध या कड़े नियम लागू करने की दिशा में कदम उठा सकता है।
अमेरिकी सांसदों ने अपनी रिपोर्ट में सुझाव दिया है कि अवैध मछली पकड़ने में शामिल चीनी कंपनियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही सहयोगी देशों के साथ मिलकर समुद्री निगरानी को मजबूत किया जाए। यह कदम चीन के लिए सीधी चुनौती माना जा रहा है क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा समुद्री गतिविधियों से जुड़ा हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल मछली तक सीमित नहीं रहेगा। यह अमेरिका और चीन के बीच चल रही व्यापक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा है। व्यापार तकनीक और सुरक्षा के बाद अब समुद्री संसाधन भी दोनों महाशक्तियों के टकराव का नया केंद्र बनते दिख रहे हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा वैश्विक राजनीति में और ज्यादा गर्मा सकता है।