जनगणना 2027 की दिशा में भारत की बड़ी तैयारी, जारी की गई प्रश्नावली

नई दिल्ली:- भारत सरकार ने वर्ष 2027 में होने वाली राष्ट्रीय जनगणना को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया के पहले चरण के लिए प्रश्नावली जारी कर दी गई है। इसे मकानसूचीकरण और मकानों की गणना कहा जाता है। इस चरण में देश के हर घर हर भवन और हर संस्थान का विस्तृत विवरण एकत्र किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि देश की बुनियादी संरचना और नागरिक सुविधाओं की वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन किया जा सके।

 

मकानसूचीकरण के दौरान यह जानकारी दर्ज की जाएगी कि मकान पक्का है या कच्चा है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि घर में पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध है या नहीं। बिजली कनेक्शन है या नहीं और शौचालय की व्यवस्था मौजूद है या नहीं। इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि कोई भवन आवासीय उपयोग में है या व्यावसायिक उद्देश्य के लिए प्रयोग किया जा रहा है। इन सभी तथ्यों से सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन स्तर किस स्थिति में है।

पहले चरण की इस गणना से आवास योजनाओं शहरी विकास कार्यक्रमों और ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़ी नीतियों को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा। यह आंकड़े यह भी बताएंगे कि किन क्षेत्रों में सुविधाओं की कमी है और कहां सुधार की सबसे अधिक जरूरत है। सरकार इन सूचनाओं के आधार पर भविष्य की योजनाओं को अधिक प्रभावी और लक्ष्य आधारित बना सकेगी।

 

जनगणना का दूसरा चरण जनसंख्या की गणना से जुड़ा होगा। इसके लिए अलग से प्रश्नावली बाद में जारी की जाएगी। इस चरण में प्रत्येक व्यक्ति की उम्र लिंग शिक्षा रोजगार भाषा और धर्म से संबंधित जानकारियां एकत्र की जाएंगी। यह डेटा देश की सामाजिक और आर्थिक संरचना को समझने के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है।

 

जनसंख्या गणना के आंकड़े नीति निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाएं इन्हीं आंकड़ों पर आधारित होती हैं। इसके अलावा संसद और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन में भी जनगणना के आंकड़ों का उपयोग किया जाता है। इसलिए यह प्रक्रिया केवल आंकड़े जुटाने तक सीमित नहीं रहती बल्कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और विकास की दिशा को भी प्रभावित करती है।

 

 

सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि जनगणना की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और तकनीक आधारित होगी। डिजिटल साधनों के उपयोग से डेटा संग्रह को अधिक सुरक्षित और सटीक बनाया जाएगा। जनगणना 2027 को भारत के भविष्य की योजनाओं की मजबूत नींव के रूप में देखा जा रहा है।

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