लखनऊ (उत्तर प्रदेश):- उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को कम्प्लायंस रिडक्शन और डी-रेगुलेशन फेज-II की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शासन व्यवस्था को भरोसे पर आधारित, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए ताकि आम नागरिकों और उद्यमियों को अनावश्यक प्रक्रियाओं अनुमतियों और निरीक्षणों से राहत मिले। उन्होंने कहा कि किए जा रहे सुधारों का असर केवल कागज़ों पर न दिखे बल्कि जमीन पर भी प्रत्यक्ष तौर पर महसूस होना चाहिए।
सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि डी-रेगुलेशन का मतलब यह नहीं है कि नियंत्रण समाप्त हो रहा है बल्कि इसका लक्ष्य यह है कि अनावश्यक नियंत्रण हटाकर जरूरी नियमों को सरल और स्पष्ट बनाया जाए। उन्होंने दोबारा कहा कि उत्तर प्रदेश का लक्ष्य “ईज ऑफ लिविंग” और “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” दोनों में देश का अग्रणी राज्य बनना है।
बैठक में यह भी बताया गया कि उत्तर प्रदेश पहले फेज में कम्प्लायंस रिडक्शन के मामले में देश में अव्वल राज्य रहा है और अब फेज-II के तहत नौ विषय क्षेत्रों, 23 प्राथमिकता क्षेत्रों और पाँच वैकल्पिक प्राथमिकता क्षेत्रों में सुधार लागू किए जा रहे हैं। इन्हीं क्षेत्रों में जैसे भूमि उपयोग मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाना, नक्शे और लेआउट अनुमोदन में जोखिम-आधारित सिस्टम लागू करना तथा बिजली कनेक्शन जैसे तकनीकी अनुमतियों को ऑनलाइन और ऑटो-अप्रूवल व्यवस्था में बदलना शामिल है।
योगी सरकार का मानना है कि प्रशासन की कार्यप्रणाली में परिवर्तन लाने से नागरिकों को रोजमर्रा की समस्याओं में सुविधा मिलेगी और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल जनता और व्यापार दोनों के हित में है और इससे उद्योगों को भी नई गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को तय समय सीमा में सुधार लागू करने तथा उनका नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं ताकि उत्तर प्रदेश में शासन प्रणाली सरल पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बने।