नई दिल्ली :- भारतीय क्रिकेट टीम को मुश्किल हालात से बाहर निकालने वाले शिवम दुबे ने मैच के बाद ड्रेसिंग रूम का माहौल लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि जब टीम का स्कोर सिर्फ 6 रन पर 2 विकेट हो गया था तब हालात बेहद तनावपूर्ण हो चुके थे। शुरुआती झटकों ने पूरे ड्रेसिंग रूम को चुप करा दिया था और हर खिलाड़ी के चेहरे पर चिंता साफ नजर आ रही थी।
शिवम दुबे ने कहा कि उस समय किसी को समझ नहीं आ रहा था कि मैच किस दिशा में जाएगा। ओपनिंग के जल्दी आउट होने से टीम पर दबाव बढ़ गया था और विपक्षी गेंदबाज पूरी लय में नजर आ रहे थे। ड्रेसिंग रूम में बैठे खिलाड़ी लगातार पिच और गेंद की हरकतों पर चर्चा कर रहे थे। कोच और सीनियर खिलाड़ी युवाओं को शांत रहने की सलाह दे रहे थे ताकि घबराहट हावी न हो।
दुबे ने आगे बताया कि जब वह बल्लेबाजी के लिए उतरे तो उनका फोकस सिर्फ एक था क्रीज पर टिकना और रन रेट को संभालना। उन्होंने कहा कि उन्हें खुद पर भरोसा था लेकिन टीम की स्थिति को देखकर जिम्मेदारी का अहसास कहीं ज्यादा था। हर रन उस समय जीत की तरफ एक कदम जैसा लग रहा था।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि दबाव के उन क्षणों में ड्रेसिंग रूम से लगातार सकारात्मक संदेश मिल रहे थे। साथी खिलाड़ी इशारों और शब्दों के जरिए हौसला बढ़ा रहे थे। कप्तान का भरोसा और टीम का समर्थन उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बना।
शिवम दुबे की पारी ने न सिर्फ टीम को संभाला बल्कि मैच का रुख भी बदल दिया। उनके दमदार शॉट्स और संयम भरी बल्लेबाजी ने विपक्षी टीम पर दबाव डाल दिया। अंत में जब भारत जीत की ओर बढ़ा तो वही ड्रेसिंग रूम जो कुछ देर पहले शांत था खुशी से झूम उठा।
दुबे का यह खुलासा बताता है कि क्रिकेट सिर्फ मैदान पर खेला जाने वाला खेल नहीं है बल्कि मानसिक मजबूती और टीम भावना की भी कड़ी परीक्षा है। मुश्किल हालात में संयम और भरोसा ही टीम को जीत तक पहुंचाता है।