नई दिल्ली :- आज के दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई तेजी से मानव जीवन का हिस्सा बनती जा रही है। शिक्षा स्वास्थ्य उद्योग मीडिया और शासन जैसे क्षेत्रों में एआई ने काम को आसान और तेज बनाया है। लेकिन इसके साथ ही एआई के दुरुपयोग से पैदा हो रहे खतरे भी गंभीर रूप लेते जा रहे हैं। ऐसे समय में समाज सरकार और तकनीकी विशेषज्ञों के लिए सतर्क होना बेहद जरूरी हो गया है।
एआई का सबसे बड़ा खतरा गलत सूचना और फर्जी कंटेंट के रूप में सामने आ रहा है। डीपफेक वीडियो फर्जी ऑडियो और नकली तस्वीरों के जरिए लोगों को भ्रमित किया जा सकता है। इससे न केवल किसी व्यक्ति की छवि खराब हो सकती है बल्कि सामाजिक तनाव और अविश्वास भी बढ़ सकता है। चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र पर भी इसका सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
साइबर अपराध के क्षेत्र में भी एआई का दुरुपयोग तेजी से बढ़ रहा है। स्वचालित हैकिंग टूल्स और डेटा चोरी के नए तरीके आम लोगों की निजी जानकारी को खतरे में डाल रहे हैं। बैंकिंग और डिजिटल भुगतान से जुड़े फ्रॉड के मामले भी एआई की मदद से और अधिक जटिल हो रहे हैं जिससे कानून व्यवस्था के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।
रोजगार के क्षेत्र में भी एआई का असर चिंता का विषय है। यदि तकनीक का इस्तेमाल केवल मुनाफे के लिए किया गया और मानवीय पहलुओं को नजरअंदाज किया गया तो बड़ी संख्या में नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। इससे आर्थिक असमानता और सामाजिक असंतोष बढ़ने का खतरा है।
इन सभी खतरों को देखते हुए यह जरूरी है कि एआई के विकास और उपयोग के लिए स्पष्ट नियम और नैतिक ढांचा तैयार किया जाए। सरकारों को सख्त कानून बनाने होंगे और तकनीकी कंपनियों को जिम्मेदारी के साथ काम करना होगा। साथ ही आम लोगों को भी डिजिटल जागरूकता बढ़ानी होगी ताकि वे एआई से जुड़े जोखिमों को समझ सकें।
एआई एक शक्तिशाली साधन है जो सही दिशा में इस्तेमाल होने पर समाज के लिए वरदान बन सकता है। लेकिन यदि इसके दुरुपयोग को समय रहते नहीं रोका गया तो यह भविष्य के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है। इसलिए आज ही इस विषय पर गंभीर होना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।