फरीदाबाद (उत्तर प्रदेश):- फरीदाबाद से मानवता को झकझोर देने वाली एक बेहद दुखद और शर्मनाक घटना सामने आई है। यहां एक टीबी से पीड़ित मरीज की मौत के बाद उसके परिवार को शव घर ले जाने के लिए एंबुलेंस तक नसीब नहीं हुई। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की असंवेदनशीलता ने एक बार फिर गरीब परिवार की मजबूरी को सड़कों पर उजागर कर दिया। इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गई लेकिन इसके बाद शुरू हुआ असली संघर्ष। अस्पताल परिसर में परिजन घंटों तक शव वाहन का इंतजार करते रहे। जब कोई सहायता नहीं मिली तो मजबूरी में परिवार को ठेले का सहारा लेना पड़ा।
आर्थिक तंगी से जूझ रहे इस परिवार के पास निजी एंबुलेंस का खर्च उठाने की क्षमता नहीं थी। अस्पताल प्रशासन से गुहार लगाई गई लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। समय बीतता गया और आखिरकार परिजन शव को ठेले पर रखकर अपने घर की ओर चल पड़े। यह दृश्य देखने वालों की आंखें नम हो गईं और व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए।
यह घटना केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं है बल्कि उस सिस्टम की सच्चाई है जो कागजों में तो योजनाओं से भरा है लेकिन जमीनी हकीकत में लाचार नजर आता है। सरकार द्वारा गरीबों के लिए मुफ्त एंबुलेंस और शव वाहन जैसी सुविधाओं के दावे किए जाते हैं लेकिन इस घटना ने उन दावों की पोल खोल दी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय पर अस्पताल प्रशासन ने जिम्मेदारी निभाई होती तो परिवार को इस अपमानजनक स्थिति से नहीं गुजरना पड़ता। समाजसेवी संगठनों ने भी घटना पर गहरा रोष जताया है और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
यह घटना एक चेतावनी है कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार केवल भाषणों से नहीं होगा। जब तक जमीनी स्तर पर संवेदनशीलता और जवाबदेही नहीं आएगी तब तक ऐसे दर्दनाक दृश्य बार बार सामने आते रहेंगे।