Mental health नई दिल्ली:- जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच मानसिक स्वास्थ्य एक नए संकट के रूप में उभर रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को समझना और उनसे निपटने के लिए तैयार रहना अत्यंत आवश्यक है।जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान प्राकृतिक आपदाएं और वायु प्रदूषण मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं। एक अध्ययन के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण 2050 तक मानसिक और व्यवहार संबंधी विकारों में 48.6% की वृद्धि हो सकती है।
मानसिक स्वास्थ्य पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव
जलवायु परिवर्तन के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों में शामिल हैं:
– तनाव और चिंता: जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान और प्राकृतिक आपदाएं तनाव और चिंता को बढ़ावा देती हैं।
– डिप्रेशन: जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली आपदाएं और आर्थिक नुकसान डिप्रेशन का कारण बन सकते हैं।
– पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी): जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली आपदाएं पीटीएसडी का कारण बन सकती हैं।
– आकोप: जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान और प्राकृतिक आपदाएं आकोप को बढ़ावा देती हैं।
जलवायु परिवर्तन और मानसिक स्वास्थ्य: क्या किया जा सकता है?
जलवायु परिवर्तन के कारण मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने के लिए कई कदम उठाए जा सकते हैं:
– मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार: मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना और उन्हें अधिक सुलभ बनाना।
– जलवायु परिवर्तन के बारे में जागरूकता: जलवायु परिवर्तन के बारे में जागरूकता बढ़ाना और लोगों को इसके प्रभावों के बारे में शिक्षित करना।
– जीवनशैली: स्थायी जीवनशैली अपनाना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए काम करना।
– समुदाय आधारित पहल: समुदाय आधारित पहल करना और लोगों को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचाने में मदद करना।