नई दिल्ली :- भारत तेजी से बदलती जीवनशैली के दौर से गुजर रहा है। काम करने के तरीके खानपान और मनोरंजन की आदतें पहले जैसी नहीं रहीं। सुबह जल्दी निकलना ऑफिस में घंटों बैठकर काम करना और रात को मोबाइल स्क्रीन के साथ खाना अब आम बात हो गई है। इकोनॉमिक सर्वे ने इसी बदलती दिनचर्या को देश में बढ़ते मोटापे की बड़ी वजह बताया है और इसे एक साइलेंट हेल्थ इमरजेंसी करार दिया है।
सर्वे के अनुसार मोटापा अब केवल शहरी या अमीर वर्ग की समस्या नहीं रह गया है। यह धीरे धीरे ग्रामीण इलाकों और युवाओं तक भी पहुंच रहा है। शारीरिक गतिविधि की कमी और प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता सेवन इसकी मुख्य वजह मानी जा रही है। फास्ट फूड मीठे पेय पदार्थ और पैकेज्ड स्नैक्स ने पारंपरिक संतुलित भोजन की जगह ले ली है। इसका असर सीधे शरीर और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
इकोनॉमिक सर्वे में चेतावनी दी गई है कि मोटापा सिर्फ वजन बढ़ने की समस्या नहीं है बल्कि इससे डायबिटीज हृदय रोग हाई ब्लड प्रेशर और मानसिक तनाव जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसका सीधा असर देश की उत्पादकता और स्वास्थ्य खर्च पर भी पड़ता है। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में हेल्थ सिस्टम पर भारी दबाव पड़ सकता है।
सर्वे यह भी बताता है कि समाधान केवल दवाओं में नहीं बल्कि जीवनशैली में बदलाव में छिपा है। रोजमर्रा की दिनचर्या में थोड़ा सा चलना सीढ़ियों का इस्तेमाल संतुलित भोजन और स्क्रीन टाइम कम करना बड़े बदलाव ला सकता है। स्कूलों दफ्तरों और समाज के स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
इकोनॉमिक सर्वे का संदेश साफ है कि विकास के साथ स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। अगर आज आदतें नहीं बदलीं तो मोटापा कल एक बड़ी राष्ट्रीय चुनौती बन सकता है।