UGC Row नई दिल्ली:- राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने यूजीसी विवाद पर मोदी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार की हर फैसले में सलाह न लेने की नीति है। सिब्बल ने कहा कि 2014 से सरकार की यह नीति रही है कि वह किसी से भी सलाह नहीं लेती है और यही कारण है कि उनके हर फैसले में यह बात झलकती है। सिब्बल ने कहा कि यूजीसी की नई नियमावली को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है इसलिए इस पर उनकी कोई राय देना उचित नहीं होगा। हालांकि उन्होंने कहा कि देश में हर वर्ग को साथ लेकर चलना होगा और किसी भी तरह की विभाजनकारी नीति से देश का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
सिब्बल ने कहा कि यूजीसी की नई नियमावली में उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव की शिकायतों को देखने के लिए “इक्विटी कमेटी” बनाने का प्रावधान है जिसमें ओबीसी, एससी, एसटी, दिव्यांग और महिलाओं के प्रतिनिधियों को शामिल करना होगा। उन्होंने कहा कि यह नियमावली 2012 की नियमावली का स्थान लेगी जो अधिकतर सलाहकारी थी।सुप्रीम कोर्ट ने पिछले गुरुवार को यूजीसी की नई नियमावली पर रोक लगा दी थी, जिसमें कहा गया था कि यह नियमावली “प्रथम दृष्टया अस्पष्ट” है और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। कोर्ट ने केंद्र और यूजीसी से 19 मार्च तक जवाब मांगा है।
सिब्बल ने आरटीआई कानून की समीक्षा के आर्थिक सर्वेक्षण के सुझाव पर भी टिप्पणी की और कहा कि वह नहीं जानते कि सरकार इसे किस हद तक लागू करना चाहती है। उन्होंने कहा कि आरटीआई एक मौलिक लोकतांत्रिक अधिकार है और इसके बिना समाज को भारी नुकसान होगा। इस बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आश्वासन दिया है कि यूजीसी की नई नियमावली का दुरुपयोग नहीं किया जाएगा और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।