Caste census दिल्ली:- भारत के प्रमुख समाजशास्त्री आंद्रे बेतिल का निधन हो गया है लेकिन उनकी विरासत आज भी प्रासंगिक है। बेतिल ने अपने काम के माध्यम से भारतीय समाज की जटिलताओं को समझने की कोशिश की, विशेष रूप से जाति व्यवस्था के संदर्भ में। उन्होंने जाति को एक गतिशील और बदलते हुए सामाजिक संरचना के रूप में देखा न कि एक स्थिर और अपरिवर्तनीय इकाई के रूप में बेतिल का मानना था कि जाति व्यवस्था को समझने के लिए हमें इसके ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भ को देखना होगा। उन्होंने दिखाया कि कैसे जाति, वर्ग और शक्ति एक दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं और कैसे ये सामाजिक संरचनाएं समय के साथ बदलती हैं। उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति, “कास्ट, क्लास एंड पावर” इस दृष्टिकोण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
बेतिल ने जाति जनगणना का विरोध किया था, उनका मानना था कि इससे जाति आधारित राजनीति को बढ़ावा मिलेगा और सामाजिक विभाजन बढ़ेगा। उन्होंने इसके बजाय वर्ग-आधारित नीतियों की वकालत की जो गरीबी और असमानता को कम करने में अधिक प्रभावी होंगी ³बेतिल की विरासत आज भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे हमें सामाजिक संरचनाओं को समझने और उन्हें बदलने के लिए प्रेरित करते हैं। उनकी कृतियाँ हमें यह याद दिलाती हैं कि समाज एक गतिशील और बदलते हुए इकाई है और हमें इसे बेहतर बनाने के लिए काम करना चाहिए।