नई दिल्ली :- परीक्षा पे चर्चा 2026 का आयोजन इस बार भी देश भर के छात्रों के लिए खास रहा। कार्यक्रम के नौवें संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों से सीधे संवाद किया और परीक्षा के दबाव से निपटने के लिए जीवन से जुड़े अनुभव साझा किए। इस मौके पर उन्होंने अपनी उम्र को लेकर एक दिलचस्प किस्सा सुनाया जिसने माहौल को हल्का और सकारात्मक बना दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उम्र सिर्फ एक संख्या होती है और सीखने की कोई सीमा नहीं होती। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि अभी पच्चीस साल बाकी हैं जिससे यह संदेश गया कि आत्मविश्वास और ऊर्जा बनाए रखना सबसे जरूरी है। छात्रों ने इस बात पर खुलकर प्रतिक्रिया दी और कार्यक्रम में उत्साह का माहौल देखने को मिला।
इस वर्ष परीक्षा पे चर्चा में भाग लेने के लिए चार करोड़ से अधिक आवेदन प्राप्त हुए जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इससे साफ है कि यह कार्यक्रम छात्रों शिक्षकों और अभिभावकों के बीच कितना लोकप्रिय हो चुका है। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल परीक्षा की तैयारी तक सीमित नहीं है बल्कि छात्रों को मानसिक रूप से मजबूत बनाना भी है।
प्रधानमंत्री ने छात्रों को सलाह दी कि वे परीक्षा को जीवन का अंतिम लक्ष्य न मानें बल्कि इसे सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा समझें। उन्होंने कहा कि असफलता से डरने के बजाय उससे सीखना चाहिए। समय प्रबंधन एकाग्रता और आत्मअनुशासन पर भी उन्होंने विशेष जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका पर भी चर्चा हुई। पीएम मोदी ने कहा कि बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें बल्कि उनके भीतर छिपी क्षमताओं को पहचानें। सकारात्मक माहौल में पढ़ाई करने से परिणाम अपने आप बेहतर आते हैं।
परीक्षा पे चर्चा 2026 ने एक बार फिर यह साबित किया कि सही मार्गदर्शन और प्रेरणा से छात्र किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं। यह कार्यक्रम केवल परीक्षा से जुड़ा संवाद नहीं बल्कि जीवन को बेहतर ढंग से समझने का मंच बन चुका है।