Construction Sector : भारत में बढ़ते निर्माण क्षेत्र से धूल का स्वास्थ्य पर प्रभाव

Construction Sector मुंबई:- भारत में तेजी से बढ़ता निर्माण क्षेत्र न केवल देश के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ा खतरा बन गया है। निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल हमारे स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है खासकर श्वसन संबंधी बीमारियों को बढ़ावा दे रही है।

धूल के स्रोत

निर्माण स्थलों पर होने वाली खुदाई, मिट्टी का काम, सड़क निर्माण और वाहनों की आवाजाही धूल के प्रमुख स्रोत हैं। इन गतिविधियों से निकलने वाले छोटे कण (PM2.5) हमारे फेफड़ों में गहराई तक पहुंच जाते हैं और श्वसन संबंधी समस्याएं पैदा करते हैं।

स्वास्थ्य पर प्रभाव

निर्माण स्थलों की धूल से न केवल निर्माण मजदूरों को खतरा है बल्कि आसपास रहने वाले लोगों को भी इसका सामना करना पड़ता है। यह धूल श्वसन संबंधी बीमारियों जैसे कि सिलिकोसिस, क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिस्ट्रेस (COPD), और लंग कैंसर का कारण बन सकती है ।

क्या किया जा सकता है?

– निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के लिए प्रभावी उपाय अपनाए जाने चाहिए जैसे कि पानी का छिड़काव और धूल अवरोधक लगाना।

– निर्माण मजदूरों को उचित सुरक्षा उपकरण और स्वास्थ्य जांच की सुविधा प्रदान की जानी चाहिए।

– सरकार को निर्माण क्षेत्र में धूल नियंत्रण के लिए सख्त नियम बनाकर उनका पालन सुनिश्चित करना चाहिए ।

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