नई दिल्ली :- भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मुकाबलों को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से चले आ रहे अनौपचारिक बॉयकॉट को खत्म कराने के लिए पाकिस्तान ने अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के सामने अपनी तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। इन मांगों को लेकर क्रिकेट जगत में चर्चाएं तेज हैं लेकिन भारत की ओर से साफ संकेत मिल रहे हैं कि इनमें से एक शर्त पर सहमति बनना लगभग नामुमकिन है।
पाकिस्तान की पहली मांग यह है कि भारत भविष्य के आईसीसी टूर्नामेंट्स में पाकिस्तान के साथ नियमित द्विपक्षीय या कम से कम न्यूट्रल वेन्यू पर मुकाबले खेलने की लिखित सहमति दे। पाकिस्तान का तर्क है कि भारत पाकिस्तान मैच आईसीसी टूर्नामेंट्स की जान होते हैं और इससे बोर्ड के साथ साथ प्रसारण कंपनियों को भी भारी फायदा होता है।
दूसरी मांग सुरक्षा और आयोजन से जुड़ी है। पाकिस्तान ने कहा है कि अगर वह किसी बड़े टूर्नामेंट की मेजबानी करता है तो भारतीय टीम को वहां खेलने से इनकार नहीं करना चाहिए और सुरक्षा के मुद्दे को राजनीतिक बहाने के तौर पर इस्तेमाल न किया जाए। पाकिस्तान चाहता है कि आईसीसी इस पर स्पष्ट दिशा निर्देश जारी करे।
तीसरी और सबसे विवादित मांग राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर है। पाकिस्तान का कहना है कि क्रिकेट को राजनीति से अलग रखा जाए और किसी भी देश की सरकार का दबाव क्रिकेट फैसलों पर न पड़े। यही वह शर्त है जिस पर भारत कभी सहमत नहीं होगा। भारत का रुख हमेशा से साफ रहा है कि पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय क्रिकेट सरकार की अनुमति और राष्ट्रीय सुरक्षा हालातों से जुड़ा मामला है।
बीसीसीआई का मानना है कि क्रिकेट को पूरी तरह राजनीति से अलग नहीं किया जा सकता खासकर तब जब सीमा पार तनाव और सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल हों। भारत आईसीसी टूर्नामेंट्स में खेलने को तैयार रहता है लेकिन द्विपक्षीय सीरीज या मेजबानी को लेकर समझौता करना उसके लिए संभव नहीं है।
अब सबकी नजर आईसीसी पर है कि वह इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है। साफ है कि भारत पाकिस्तान क्रिकेट मुकाबले सिर्फ खेल नहीं बल्कि कूटनीति और नीति का भी बड़ा मुद्दा बन चुके हैं।