एक यात्री ने जब 1AC का टिकट बुक कराया तो उसके मन में आरामदायक और सुकून भरी यात्रा की तस्वीर थी। सफर शुरू हुआ तो वह खुशी खुशी अपनी सीट पर बैठा लेकिन कुछ ही देर में हालात बदल गए। उसी कोच में एक मां बेटी दो बिल्लियों के साथ सवार हो गईं और यहीं से यात्री के लिए पूरी यात्रा परेशानी भरी बन गई।
यात्री के मुताबिक दोनों बिल्लियां बार बार सीटों पर घूम रही थीं। कभी वे सामान पर चढ़ जातीं तो कभी यात्रियों के पैरों के पास आ जातीं। एलर्जी से परेशान यात्री को छींक और घबराहट होने लगी। उसने मां बेटी से विनम्रता से अनुरोध किया कि बिल्लियों को संभालकर रखें लेकिन उनकी ओर से कोई खास सहयोग नहीं मिला।
यात्री का कहना है कि 1AC जैसे प्रीमियम कोच में साफ सफाई और आराम की उम्मीद की जाती है। जानवरों की मौजूदगी से न केवल असहजता हुई बल्कि नींद भी पूरी नहीं हो पाई। पूरी रात वह बेचैनी में काटनी पड़ी और सफर जो आरामदेह होना चाहिए था वह नर्क जैसा लगने लगा।
यात्री ने रेलवे स्टाफ से भी शिकायत की लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं मिल पाया। उसने सोशल मीडिया पर अपना अनुभव साझा करते हुए सवाल उठाया कि क्या बिना नियमों के पालतू जानवरों को एसी कोच में ले जाना सही है। कई यूजर्स ने उसकी बात का समर्थन किया और रेलवे से स्पष्ट गाइडलाइन बनाने की मांग की।
यह घटना यात्रियों की सुविधा और नियमों के पालन पर एक बार फिर सवाल खड़े करती है। आरामदायक यात्रा के नाम पर महंगा टिकट लेने वाले यात्रियों को ऐसी परेशानियों से बचाने के लिए रेलवे को सख्त कदम उठाने की जरूरत है।