नई दिल्ली :- फिल्म अभिनेता राजपाल यादव इन दिनों कर्ज से जुड़े मामले को लेकर चर्चा में हैं। खबरों के मुताबिक भुगतान न कर पाने के मामले में उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना पड़ा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या सजा काट लेने के बाद उनका 9 करोड़ रुपये का कर्ज अपने आप माफ हो जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार आपराधिक सजा और कर्ज की देनदारी दो अलग विषय होते हैं। यदि किसी व्यक्ति को अदालत द्वारा सजा दी जाती है तो वह दंड कानून के उल्लंघन से जुड़ा होता है। वहीं कर्ज एक सिविल देनदारी है जिसे चुकाना कानूनी रूप से अनिवार्य रहता है। इसका मतलब यह है कि जेल की सजा पूरी कर लेने मात्र से बकाया रकम स्वतः समाप्त नहीं होती।
यदि अदालत ने जुर्माना या मुआवजे के रूप में राशि जमा करने का आदेश दिया है तो वह आदेश प्रभावी रहता है। कर्जदाता पक्ष अलग से वसूली की प्रक्रिया भी जारी रख सकता है। हालांकि कई मामलों में अदालत के बाहर समझौता या सेटलमेंट होने पर विवाद खत्म हो सकता है।
कानूनी प्रक्रिया में यह भी देखा जाता है कि क्या दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ है या भुगतान की शर्तें तय की गई हैं। यदि पूरा भुगतान हो जाता है या लिखित समझौता हो जाता है तो मामला समाप्त हो सकता है। लेकिन केवल सजा काटने से कर्ज स्वतः माफ नहीं होता।
इसलिए विशेषज्ञों की राय है कि किसी भी वित्तीय विवाद में अंतिम समाधान भुगतान या कानूनी समझौते से ही संभव है। अदालत के आदेश और संबंधित दस्तावेज ही तय करेंगे कि आगे की कार्रवाई क्या होगी।