Heart Disease नई दिल्ली: भारत में हर साल लगभग 2.4 लाख बच्चे हृदय दोष के साथ पैदा होते हैं और इनमें से लगभग एक तिहाई बच्चों को जीवन के पहले वर्ष में ही सर्जरी की आवश्यकता होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बच्चों के हृदय रोग के खिलाफ लड़ाई गर्भावस्था से ही शुरू हो जाती है?
डॉक्टरों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान ही बच्चों के हृदय रोग का पता लगाया जा सकता है और समय पर इलाज से इन बच्चों को बचाया जा सकता है। लेकिन भारत में अभी भी कई मायनों में यह लड़ाई अधूरी है। गर्भावस्था के 18वें से 20वें सप्ताह के बीच अल्ट्रासाउंड स्कैन से बच्चों के हृदय रोग का पता लगाया जा सकता है। लेकिन भारत में अभी भी कई गर्भवती महिलाओं को यह स्कैन नहीं कराया जाता है और अगर कराया भी जाता है तो कई बार डॉक्टरों को हृदय दोष का पता नहीं चल पाता है।
डॉ. सुनीत खुराना, एक प्रसिद्ध पेडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट, कहते हैं “गर्भावस्था के दौरान ही बच्चों के हृदय रोग का पता लगाना बहुत महत्वपूर्ण है। इससे हमें समय पर इलाज करने का मौका मिलता है और कई बार तो बच्चे को बचाया भी जा सकता है।” लेकिन इसके बावजूद भारत में अभी भी कई बच्चों को हृदय दोष के साथ पैदा होने के बाद ही इलाज मिल पाता है। और कई बार तो इलाज की कमी के कारण उनकी जान भी जाती है।
डॉ. खुराना कहते हैं, “हमारे देश में हृदय दोष के साथ पैदा होने वाले बच्चों की संख्या बहुत अधिक है। हमें गर्भावस्था के दौरान ही इन बच्चों का पता लगाने और इलाज करने के लिए काम करना होगा।” भारत सरकार ने भी इस समस्या को समझा है और गर्भावस्था के दौरान ही बच्चों के हृदय रोग का पता लगाने और इलाज करने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना बाकी है।
डॉ. खुराना कहते हैं, “हमारे देश में गर्भावस्था के दौरान ही बच्चों के हृदय रोग का पता लगाने और इलाज करने के लिए बहुत काम करना होगा। हमें लोगों को जागरूक करना होगा, और डॉक्टरों को प्रशिक्षित करना होगा।” भारत में बच्चों के हृदय रोग के खिलाफ लड़ाई एक लंबी और कठिन लड़ाई है लेकिन अगर हम गर्भावस्था से ही शुरू करें तो हम इस लड़ाई को जीत सकते हैं।