लखनऊ (उत्तर प्रदेश):- उत्तर प्रदेश से बड़ी खबर सामने आई है जहां को तेजी से नेचुरल फॉर्मिंग हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रदेश में प्राकृतिक खेती का दायरा बढ़कर लगभग 94300 हेक्टेयर तक पहुंच गया है जो खेती के टिकाऊ मॉडल की ओर बड़ा कदम माना जा रहा है।
सरकार ने इस अभियान को और मजबूत करने के लिए करीब 298 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बनाई है। इसके तहत किसानों को प्रशिक्षण तकनीकी सहयोग और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि रासायनिक खेती पर निर्भरता कम हो और मिट्टी की सेहत बेहतर बने।
नीति का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं बल्कि किसानों को स्वस्थ खाद्य उत्पादन के माध्यम से समाज के लिए आरोग्यदाता बनाना है। प्राकृतिक खेती से लागत घटने के साथ पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधनों के संतुलित उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से किसानों की आय में सुधार होगा और बाजार में जैविक उत्पादों की उपलब्धता बढ़ेगी। सरकार लगातार जागरूकता कार्यक्रम चला रही है ताकि अधिक से अधिक किसान इस मॉडल को अपनाएं और प्रदेश को सतत कृषि का अग्रणी राज्य बनाया जा सके।