Commerce Ministry नई दिल्ली: भारत सरकार ने अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टैरिफ पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि सरकार अमेरिका के टैरिफ और उनके प्रभावों का अध्ययन कर रही है।
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “हमने अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देखा है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रेस कॉन्फ्रेंस को भी सुना है। अमेरिका प्रशासन ने कुछ कदम उठाए हैं जिनका हम अध्ययन कर रहे हैं।” यह बयान अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के टैरिफ को अवैध घोषित करने के बाद आया है। कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियों अधिनियम (IEEPA) का उल्लंघन किया है जो राष्ट्रपति को आपातकालीन स्थिति में व्यापार को नियंत्रित करने की शक्ति देता है लेकिन टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता है।
ट्रंप ने फैसले के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौता अभी भी लागू रहेगा और भारत को 18% टैरिफ देना होगा। हालांकि व्हाइट हाउस ने बाद में स्पष्ट किया कि भारत पर 10% टैरिफ लगाया जाएगा जो 150 दिनों के लिए प्रभावी रहेगा। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता मार्च में हस्ताक्षरित होने की संभावना है और अप्रैल में लागू होगा। उन्होंने कहा कि समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है।
कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में भारत के हितों की रक्षा नहीं कर रही है। कांग्रेस नेता जयराम ने कहा कि सरकार को समझौते को रोकना चाहिए और नए सिरे से बातचीत करनी चाहिए। अमेरिका के टैरिफ के फैसले का भारत के निर्यातकों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है खासकर कपड़ा और रत्न जैसे श्रम-आंतरिक क्षेत्रों में।