IDFC Bank : आईडीएफसी बैंक घोटाला: कर्मचारियों की मिलीभगत से हरियाणा सरकार के खातों में ₹590 करोड़ की सेंध

IDFC Bank मुंबई:- बैंकिंग जगत में उस वक्त हड़कंप मच गया जब आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने खुलासा किया कि उसकी चंडीगढ़ स्थित एक शाखा में हरियाणा सरकार के खातों के साथ ₹590 करोड़ की बड़ी धोखाधड़ी हुई है। बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ वी. वैद्यनाथन ने सोमवार को पुष्टि की कि यह कोई तकनीकी चूक नहीं, बल्कि बैंक कर्मचारियों और बाहरी अपराधियों के बीच गहरी मिलीभगत का नतीजा है।

कैसे हुआ घोटाले का खुलासा?

यह मामला तब सामने आया जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद करने और फंड ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। इस प्रक्रिया के दौरान, बैंक के रिकॉर्ड और सरकारी विभाग के आंकड़ों के बीच भारी विसंगति पाई गई। इसके बाद जब अन्य संबंधित खातों की जांच की गई, तो कुल ₹590 करोड़ के फर्जीवाड़े का पता चला।

बैंक और सरकार की बड़ी कार्रवाई

इस गंभीर मामले के सामने आते ही बैंक और सरकार दोनों ने सख्त कदम उठाए हैं:

कर्मचारियों पर गाज: बैंक ने चंडीगढ़ शाखा के चार संदिग्ध अधिकारियों को तुरंत निलंबित कर दिया है।

पुलिस केस और फॉरेंसिक ऑडिट: मामले की जांच के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है और KPMG को स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट के लिए नियुक्त किया गया है।

हरियाणा सरकार का कड़ा फैसला: मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर हरियाणा सरकार ने IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को अपनी एम्पैनल्ड लिस्ट (Empanelled List) से बाहर कर दिया है। अब राज्य का कोई भी विभाग इन बैंकों में सरकारी पैसा जमा नहीं करेगा।

बाजार और निवेशकों पर असर

इस खबर के बाहर आते ही शेयर बाजार में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयरों में 20% तक की भारी गिरावट देखी गई। आरबीआई (RBI) गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, हालांकि उन्होंने इसे पूरी बैंकिंग प्रणाली के लिए खतरा मानने से इनकार किया है।

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