RBI Watching नई दिल्ली:- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने सोमवार को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में सामने आए 590 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले पर बयान जारी किया है। केंद्रीय बोर्ड की बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए गवर्नर ने स्पष्ट किया कि हालांकि बैंक में हुई यह घटना गंभीर है, लेकिन इससे देश की बैंकिंग प्रणाली (systemic risk) को कोई खतरा नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने रविवार को खुलासा किया था कि उसके चंडीगढ़ स्थित एक शाखा में कर्मचारियों और बाहरी तत्वों की मिलीभगत से 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया है। यह मामला मुख्य रूप से हरियाणा सरकार के कुछ विशिष्ट खातों से जुड़ा हुआ है। बैंक के अनुसार, यह अनियमितता केवल एक विशेष समूह के खातों तक ही सीमित है और इससे अन्य ग्राहकों की जमा राशि पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।
गवर्नर ने क्या कहा?
भारतीय रिजर्व बैंक गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्थिति को संभालते हुए कहा:
“हम इस पूरे घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहे हैं। यह एक व्यक्तिगत बैंक से जुड़ा मामला है और इसमें बैंकिंग व्यवस्था के लिए कोई व्यवस्थित (systemic) चिंता की बात नहीं है। RBI की नीति के अनुसार हम व्यक्तिगत संस्थाओं पर अधिक टिप्पणी नहीं करते, लेकिन निगरानी जारी है।”
प्रमुख बिंदु:
* धोखाधड़ी की राशि: कुल 590 करोड़ रुपये, जिसमें आंतरिक ऑडिट और रिकंसिलिएशन के दौरान गबन पकड़ा गया।
* बैंक की कार्रवाई: IDFC First Bank ने संबंधित कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है और मामले की फॉरेंसिक ऑडिट के लिए KPMG को नियुक्त किया है।
* हरियाणा सरकार का कड़ा रुख: धोखाधड़ी सामने आने के बाद हरियाणा सरकार ने IDFC First Bank और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को अपने पैनल से हटा दिया है।
* बाजार की प्रतिक्रिया: इस खबर के बाद बैंक के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई, जो इंट्रा-डे ट्रेडिंग के दौरान लगभग 20% तक लुढ़क गए।
IDFC First Bank के सीईओ वी. वैद्यनाथन ने आश्वासन दिया है कि बैंक रिकवरी के प्रयास कर रहा है और बीमा कवर के माध्यम से वित्तीय प्रभाव को कम किया जाएगा। वर्तमान में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
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