Fraud case : हरियाणा विधानसभा में भारी हंगामा, ₹590 करोड़ की धोखाधड़ी पर मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन

Fraud Case चंडीगढ़: हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में हुए ₹590 करोड़ के बड़े घोटाले को लेकर सदन में जबरदस्त हंगाम हुआ। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मुद्दे पर काम रोको प्रस्ताव (Adjournment Motion) लाने की मांग की और सरकार को घेरते हुए पूछा कि जनता का पैसा निजी बैंकों में क्यों रखा गया।

मामला क्या है?

यह धोखाधड़ी तब सामने आई जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने IDFC फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा से अपना खाता बंद करने और फंड ट्रांसफर करने का अनुरोध किया। बैंक के रिकॉर्ड और विभाग के आंकड़ों में बड़ा अंतर पाया गया। प्रारंभिक जांच में पता चला कि लगभग ₹590 करोड़ की राशि का हेरफेर किया गया है।

विधानसभा में विपक्ष के तेवर

नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सदन में सरकार से सवाल किया कि सरकारी कोष को निजी बैंकों में जमा करने की अनुमति किन अधिकारियों ने दी? विपक्ष के शोर-शराबे और वॉकआउट के बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्थिति स्पष्ट की।

सरकार की कार्रवाई और आश्वासन

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सदन को भरोसा दिलाया कि “जनता का एक-एक पैसा सुरक्षित है और उसे ब्याज सहित वापस लाया जाएगा।” उन्होंने इस मामले में निम्नलिखित कदमों की घोषणा की:

* ACB जांच: मामले की जांच एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) और राज्य सतर्कता विभाग को सौंप दी गई है।

* बैंक पर प्रतिबंध: हरियाणा सरकार ने IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी कामकाज की सूची (Empanelled list) से तुरंत बाहर कर दिया है।

* खाते बंद करने के आदेश: सभी सरकारी विभागों को इन बैंकों से अपने खाते बंद करने और फंड को राष्ट्रीयकृत बैंकों में ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए हैं।

बैंक का पक्ष: आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने स्वीकार किया है कि यह उसके कुछ कर्मचारियों द्वारा की गई धोखाधड़ी है। बैंक ने 4 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है और मामले की फॉरेंसिक ऑडिट के आदेश दिए हैं।

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