MOU mean : भारत-ब्राजील क्रिटिकल मिनरल्स समझौता: दोनों देशों के लिए क्या है इसका मतलब?

MOU Means नई दिल्ली- भारत और ब्राजील ने क्रिटिकल मिनरल्स और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों पर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। इस समझौते के तहत, दोनों देश खनन, प्रसंस्करण, और पुनर्चक्रण जैसे क्षेत्रों में सहयोग करेंगे।

इस समझौते का मुख्य उद्देश्य भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और चीन पर निर्भरता को कम करने के लिए है। ब्राजील के पास दुनिया के दूसरे सबसे बड़े दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के भंडार हैं, जो इलेक्ट्रिक वाहनों, सौर पैनलों, और अन्य उच्च-तकनीक उत्पादों के निर्माण में उपयोग होते हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को “सप्लाई चेन में लीलापन लाने के लिए एक बड़ा कदम” बताया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगा और वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत बनाएगा।

ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने कहा कि यह समझौता नवीकरणीय ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स में सहयोग को बढ़ावा देगा। उन्होंने कहा कि दोनों देश इस समझौते के माध्यम से वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति को मजबूत करेंगे। इस समझौते के तहत दोनों देश खनन, प्रसंस्करण, और पुनर्चक्रण जैसे क्षेत्रों में सहयोग करेंगे। वे संयुक्त रूप से खनन परियोजनाओं को विकसित करने और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों के प्रसंस्करण के लिए तकनीक को साझा करने पर भी काम करेंगे।

इस समझौते का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह भारत को ब्राजील के साथ व्यापार को बढ़ावा देने में मदद करेगा। दोनों देशों के बीच वर्तमान व्यापार लगभग 15 अरब डॉलर है, जिसे अगले पांच वर्षों में 20 अरब डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य है। इस समझौते का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह भारत को वैश्विक बाजार में अपनी स्थिति को मजबूत करने में मदद करेगा। भारत और ब्राजील दोनों ही वैश्विक दक्षिण के प्रमुख देश हैं और इस समझौते के माध्यम से वे अपनी आवाज को मजबूत बनाएंगे।

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