NCERT apologises नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने हाल ही में अपनी एक पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका के भीतर ‘भ्रष्टाचार’ से संबंधित एक विवादास्पद खंड को शामिल करने के लिए औपचारिक रूप से माफी मांगी है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि इस सामग्री वाली पुस्तकों के वितरण को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है और बाजार में मौजूद प्रतियों को संशोधित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब कक्षा 12वीं की राजनीति विज्ञान (Political Science) की संशोधित पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका की कार्यप्रणाली पर चर्चा करते समय ‘भ्रष्टाचार’ शब्द का उल्लेख किया गया। इस खंड में कथित तौर पर न्यायिक प्रणाली की अखंडता पर सवाल उठाए गए थे, जिसे कानूनी विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने ‘अनुचित’ और ‘संस्थान की छवि धूमिल करने वाला’ बताया। जैसे ही यह मामला चर्चा में आया, न्यायपालिका के सम्मान और गरिमा को लेकर बहस छिड़ गई। आलोचकों का तर्क था कि बिना किसी ठोस डेटा या संदर्भ के छात्रों को न्यायपालिका के बारे में ऐसी नकारात्मक जानकारी देना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
NCERT का आधिकारिक रुख
चौतरफा दबाव और समीक्षा के बाद, NCERT ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इसे एक “अनजाने में हुई चूक” बताया। परिषद के प्रवक्ता ने कहा:”हमारा उद्देश्य किसी भी संवैधानिक संस्था की गरिमा को ठेस पहुंचाना नहीं था। न्यायपालिका पर टिप्पणी वाला हिस्सा अनपेक्षित था। हम इसके लिए क्षमाप्रार्थी हैं और हमने उन किताबों की आपूर्ति रोक दी है जिनमें यह अंश मौजूद था।”