Political agenda नई दिल्ली: एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक में “जुडिशियरी में भ्रष्टाचार” पर एक अध्याय को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए पाठ्यपुस्तक की बिक्री और वितरण पर रोक लगा दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी को निर्देश दिया है कि वह पाठ्यपुस्तक के सभी संस्करणों को वापस ले और डिजिटल संस्करणों को हटाए। अदालत ने यह भी कहा कि इस अध्याय को फिर से लिखा जाएगा और अगले शैक्षणिक सत्र में छात्रों को उपलब्ध कराया जाएगा एनसीईआरटी ने एक बयान जारी कर कहा कि अध्याय में शामिल सामग्री “अनजाने में हुई गलती” थी और उन्होंने इसके लिए माफी मांगी है। एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी ने कहा कि अध्याय को फिर से लिखा जाएगा और अगले शैक्षणिक सत्र में छात्रों को उपलब्ध कराया जाएगा ।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की सामग्री छात्रों के मन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। अदालत ने एनसीईआरटी और शिक्षा मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस विवाद के बाद एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा और अनुमोदन प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि पाठ्यपुस्तकों में इस तरह की सामग्री शामिल करना अनुचित है और छात्रों को गुमराह कर सकता है।
इस मुद्दे पर राजनीति भी शुरू हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। सरकार ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि वह न्यायपालिका का सम्मान करती है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई 11 मार्च को निर्धारित की है। तब तक, एनसीईआरटी को पाठ्यपुस्तक के सभी संस्करणों को वापस लेना होगा और डिजिटल संस्करणों को हटाना होगा।