Rape case कोच्चि: 2017 के चर्चित अभिनेता यौन उत्पीड़न मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। केरल सरकार ने शुक्रवार (27 फरवरी, 2026) को केरल उच्च न्यायालय में एक अपील दायर कर अभिनेता दिलीप और तीन अन्य आरोपियों को बरी किए जाने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है।
सरकार की मुख्य दलीलें
राज्य सरकार ने एर्नाकुलम प्रिंसिपल सेशंस कोर्ट के दिसंबर 2025 के फैसले को ‘अवैध’ और ‘अस्थिर’ बताया है। सरकार की दलील है कि:
साक्ष्यों की अनदेखी: ट्रायल कोर्ट ने डिजिटल साक्ष्यों और साजिश से जुड़ी कड़ियों का समग्र मूल्यांकन करने में गलती की है।
दोहरा मापदंड: अपील में कहा गया है कि अदालत ने दिलीप के खिलाफ सबूतों को परखने के लिए अलग और त्रुटिपूर्ण मापदंड अपनाए।
मास्टरमाइंड: अभियोजन पक्ष ने दिलीप को इस पूरी घटना का ‘मास्टरमाइंड’ (मुख्य साजिशकर्ता) बताया है और उनकी रिहाई को न्याय की विफलता करार दिया है।
सजा बढ़ाने की अपील
रिहाई को चुनौती देने के साथ-साथ, सरकार ने उन छह दोषियों की सजा बढ़ाने की भी मांग की है जिन्हें ट्रायल कोर्ट ने 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। सरकार का तर्क है कि सामूहिक बलात्कार (Gang Rape) जैसे जघन्य अपराध के लिए दी गई सजा अपराध की गंभीरता के मुकाबले बहुत कम है और इसे आजीवन कारावास में बदला जाना चाहिए।
पृष्ठभूमि
यह मामला फरवरी 2017 का है, जब एक प्रसिद्ध मलयालम अभिनेत्री का चलती कार में अपहरण और यौन उत्पीड़न किया गया था। ट्रायल कोर्ट ने पल्सर सुनी सहित छह लोगों को दोषी ठहराया था, लेकिन अभिनेता दिलीप, चार्ली थॉमस, सनिल कुमार और सरथ जी. नायर को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।