Iran Air Strikes/तेहरान:- पश्चिम एशिया में महीनों से सुलग रही तनाव की चिंगारी ने अब एक भीषण महायुद्ध का रूप ले लिया है। लंबे समय से जारी जुबानी जंग और छिटपुट हमलों के बाद, अमेरिका और इस्राइल की वायुसेनाओं ने एक साझा सैन्य अभियान के तहत ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है। इस हमले के बाद पूरे क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण से बाहर होती नजर आ रही है।
ईरान के कई शहरों पर बरसे बम
बीती रात ‘ऑपरेशन डेजर्ट थंडर’ (सांकेतिक नाम) के तहत अमेरिकी स्टील्थ फाइटर जेट्स और इस्राइली वायुसेना के विमानों ने ईरान की हवाई सीमा में प्रवेश किया। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान की राजधानी तेहरान, परमाणु केंद्र वाले शहर इस्फ़हान, और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण शिराज व तबरीज़ में भीषण धमाके सुने गए स्राइली रक्षा बलों (IDF) के अनुसार, यह हमला ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के ठिकानों, मिसाइल उत्पादन केंद्रों और एयर डिफेंस सिस्टम को तबाह करने के लिए किया गया था। चश्मदीदों का कहना है कि आसमान आग के गोलों से लाल हो गया था और हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कई किलोमीटर दूर तक धरती कांप उठी।
बड़ा दावा: अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत?
इस सैन्य कार्रवाई के बीच सबसे चौंकाने वाली खबर वाशिंगटन और यरूशलेम से आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति और इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया है कि इस सर्जिकल स्ट्राइक में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए हैं।अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “हमने उस जुल्म के केंद्र को निशाना बनाया है जो दुनिया भर में अस्थिरता फैला रहा था। हमारे पास पुख्ता जानकारी है कि हमलों के समय खामेनेई अपने सुरक्षित ठिकाने पर थे, जिसे पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है।” हालांकि ईरान की सरकारी मीडिया ने अभी तक इस खबर की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है लेकिन तेहरान में छाई चुप्पी कई बड़े सवाल खड़े कर रही है।
ईरान का पलटवार: अमेरिकी ठिकानों पर हमले
खामेनेई की मौत की खबरों और देश पर हुए हमलों के बाद ईरान ने भी भीषण जवाबी कार्रवाई की है। ईरान की ओर से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों ने इराक, सीरिया और कतर में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरानी रक्षा मंत्रालय के एक संक्षिप्त बयान में कहा गया, “दुश्मन ने लाल रेखा पार कर ली है। अब उनकी कोई भी चौकी सुरक्षित नहीं रहेगी।” शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इराक में अल-असद एयरबेस पर ईरान ने दर्जनों मिसाइलें गिराई हैं, जिससे भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
दुनिया पर मंडराया संकट
इस संघर्ष ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। रूस और चीन ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताया है, वहीं ब्रिटेन और फ्रांस ने इसे इस्राइल के ‘आत्मरक्षा के अधिकार’ का समर्थन कहा है इस हमले के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 15% का उछाल देखा गया है। यदि यह युद्ध आगे खिंचता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह एक बड़ी तबाही साबित हो सकता है।