Iran National Mourning 40 Days /तेहरान:- पश्चिम एशिया से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। महीनों से चल रहे तनाव के बीच, अमेरिका और इस्राइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई ने ईरान के शीर्ष नेतृत्व को खत्म कर दिया है। ईरान के सरकारी टेलीविजन (IRIB) ने भारी मन और आंसुओं के साथ देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि कर दी है। इस खबर के बाद न केवल ईरान, बल्कि पूरी दुनिया सन्न है।
लाइव टीवी पर एंकर के निकले आंसू
ईरान के सरकारी न्यूज चैनल पर दृश्य भावुक कर देने वाले थे। काले लिबास में लिपटी एक महिला न्यूज़ एंकर ने जैसे ही बुलेटिन शुरू किया, उसकी आवाज कांपने लगी। एंकर ने रोते हुए राष्ट्र को संबोधित किया और बताया कि देश के ‘रूहानी पिता’ और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई अब इस दुनिया में नहीं रहे। एंकर ने कहा, “ईरान के शेर और इस्लाम के रक्षक ने शहादत प्राप्त कर ली है।” इस घोषणा के तुरंत बाद ईरान के सभी सरकारी चैनलों पर कुरान की आयतें चलने लगीं और राष्ट्रगान की जगह शोक धुन बजने लगी।
ईरान में 40 दिनों का महा-शोक
ईरानी सरकार और ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ ने खामेनेई की मौत के बाद देश में 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक का ऐलान किया है। तेहरान की सड़कों पर सन्नाटा पसरा है, तो वहीं मस्जिदों से मातम की आवाजें आ रही हैं। देश के सभी सरकारी संस्थान, स्कूल और बाजार अगले आदेश तक बंद कर दिए गए हैं। सरकारी इमारतों पर लगे राष्ट्रीय ध्वज को झुका दिया गया है।
कैसे हुआ हमला?
खुफिया सूत्रों के अनुसार अमेरिका और इस्राइल ने एक अत्यंत गुप्त और सटीक ‘पिनपॉइंट स्ट्राइक’ को अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि खामेनेई एक गुप्त बंकर में उच्च स्तरीय सैन्य बैठक कर रहे थे, तभी मल्टीपल ‘बंकर बस्टर’ मिसाइलों ने उस ठिकाने को नेस्तनाबूद कर दिया। व्हाइट हाउस ने इस हमले को “न्याय की जीत” बताया है, जबकि इस्राइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे “नये युग की शुरुआत” करार दिया है।
अब क्या होगा ईरान में? उत्तराधिकार का संकट
खामेनेई की मौत ने ईरान के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—अब अगला कौन?
सत्ता का संघर्ष: ईरान के संविधान के अनुसार, ‘विशेषज्ञों की परिषद’ (Assembly of Experts) को नया सर्वोच्च नेता चुनना होगा। हालांकि, खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई का नाम सबसे आगे है, लेकिन देश के भीतर कट्टरपंथियों और उदारवादियों के बीच गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) का रुख: ऐसी आशंका जताई जा रही है कि सेना (IRGC) पूरी तरह से सत्ता अपने हाथ में ले सकती है। अगर ऐसा होता है, तो ईरान एक पूर्ण सैन्य तानाशाही में बदल सकता है।
भीषण जवाबी कार्रवाई: ईरान की सेना ने पहले ही ‘कठोर प्रतिशोध’ की कसम खाई है। पूरी दुनिया को डर है कि ईरान अब अपने ‘प्रॉक्सि’ संगठनों (हिजबुल्लाह, हुती) के जरिए अमेरिका और इस्राइल पर आत्मघाती हमले तेज कर सकता है।
वैश्विक प्रभाव और तेल की कीमतें
खामेनेई के जाने से कच्चे तेल के बाजार में आग लग गई है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने की आशंका है। भारत सहित कई एशियाई देशों के लिए यह आर्थिक संकट की घड़ी हो सकती है।