Remote Access Fraud/भोपाल:- मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MP-ESB) की परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। तकनीकी सुरक्षा और कृत्रिम होशियारी (AI) के पहरे ने उन 12 अभ्यर्थियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है, जिन्होंने परीक्षा प्रणाली में ‘डिजिटल सेंधमारी’ की कोशिश की थी। रतलाम के एक परीक्षा केंद्र से जुड़े इन उम्मीदवारों की उम्मीदवारी तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी गई है। यह मामला केवल साधारण नकल का नहीं बल्कि हाईटेक डिजिटल हेरफेर का है जिसे पकड़ने के लिए सिस्टम ने पहली बार इतने उन्नत स्तर पर डेटा विश्लेषण का सहारा लिया है।
कैसे खुली पोल? AI और डेटा ने ऐसे दबोचा
आमतौर पर नकल का मतलब पर्ची या मोबाइल होता है लेकिन इस बार मामला ‘लॉग टाइम’ (Log Time) और ‘बिहेवियरल पैटर्न’ (Behavioral Pattern) से जुड़ा था। जांच के दौरान सुरक्षा प्रणालियों ने कुछ ऐसी विसंगतियां पकड़ीं जो मानवीय आंखों से ओझल हो सकती थीं:
असामान्य लॉग-इन पैटर्न: परीक्षा के दौरान सिस्टम के लॉग डेटा में पाया गया कि इन 12 अभ्यर्थियों के कंप्यूटरों पर प्रतिक्रिया का समय (Response Time) सामान्य मानव क्षमता से मेल नहीं खा रहा था। AI विश्लेषण ने संकेत दिया कि प्रश्नों के उत्तर जिस गति और तरीके से दिए गए, वह किसी ‘बाहरी हस्तक्षेप’ या ‘रिमोट एक्सेस’ की ओर इशारा कर रहे थे।
CCTV और फुटप्रिंट विश्लेषण: परीक्षा केंद्रों पर लगे हाई-डेफिनिशन CCTV कैमरों की फीड को जब AI एल्गोरिदम के जरिए प्रोसेस किया गया, तो इन अभ्यर्थियों की शारीरिक गतिविधियों और स्क्रीन पर चल रहे घटनाक्रम में तालमेल की कमी पाई गई।
संदेहास्पद डेटा ट्रैफिक: जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित परीक्षा केंद्र के सर्वर पर उस विशेष समय के दौरान कुछ ‘असामान्य डेटा पैकेट’ दिखाई दिए, जो हाईटेक नकल की आशंका को पुख्ता करते हैं।
युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ या सिस्टम की मजबूती?
इस घटना ने एक बार फिर भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर इसे युवाओं के भविष्य के साथ क्रूर मजाक माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन इसे अपनी तकनीक की जीत बता रहा है। विशेषज्ञों का कहना है: “नकल करने वाले अब तकनीक का सहारा ले रहे हैं, लेकिन वे यह भूल रहे हैं कि डिजिटल फुटप्रिंट कभी मिटते नहीं। AI और लॉग एनालिसिस के जरिए अब सेकंड के सौवें हिस्से में की गई हेरफेर को भी पकड़ा जा सकता है।”
मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने स्पष्ट किया है कि मामला अभी जांच के अधीन है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस खेल के पीछे कौन सा ‘सॉल्वर गैंग’ या तकनीकी एक्सपर्ट सक्रिय था। मंडल का कहना है कि भविष्य में AI-आधारित प्रोक्टरिंग को और कड़ा किया जाएगा ताकि ईमानदार अभ्यर्थियों के साथ न्याय हो सके।