Murugan Temple Conservation/चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए एक बड़ा बयान दिया है। मदुरै के पास स्थित प्राचीन और प्रतिष्ठित थिरुपरंकुंड्रम मुरुगन मंदिर के संदर्भ में बोलते हुए, मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार इस मंदिर की सदियों पुरानी परंपराओं, रीति-रिवाजों और पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए पूरी तरह समर्पित है।
सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण: सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि थिरुपरंकुंड्रम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह तमिल संस्कृति, वास्तुकला और इतिहास का एक जीवंत प्रतीक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आधुनिकता के इस दौर में भी मंदिर की पारंपरिक पद्धतियों में कोई छेड़छाड़ नहीं होने दी जाएगी।स्टालिन के अनुसार, “द्रविड़ मॉडल” की सरकार समावेशी विकास के साथ-साथ राज्य की आध्यात्मिक धरोहरों को संजोने में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा:”हमारी सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि आने वाली पीढ़ियां भी उसी श्रद्धा और भव्यता के साथ इन मंदिरों के दर्शन कर सकें, जैसा कि सदियों से होता आ रहा है। थिरुपरंकुंड्रम की परंपराओं की रक्षा करना मेरा व्यक्तिगत और नैतिक संकल्प है।”
मंदिर प्रबंधन और बुनियादी ढांचे में सुधार
मुख्यमंत्री ने हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्त (HR&CE) विभाग को निर्देश दिया है कि वे मंदिर के उत्सवों और दैनिक अनुष्ठानों के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करें। सरकार ने मंदिर परिसर के आसपास भक्तों के लिए बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के लिए विशेष कोष आवंटित किया है। इसमें शामिल हैं:
अनुष्ठानों की शुद्धता: पारंपरिक पुजारियों और आगम शास्त्रों के अनुसार पूजा पद्धतियों का पालन।
जीर्णोद्धार कार्य: मंदिर की प्राचीन मूर्तियों और गोपुरों की नक्काशी को नुकसान पहुंचाए बिना वैज्ञानिक तरीके से मरम्मत।
भक्तों की सुविधा: अन्नदानम योजना का विस्तार और तीर्थयात्रियों के लिए ठहरने की उन्नत व्यवस्था।
विवादों पर विराम और सद्भाव का संदेश
अपने संबोधन में स्टालिन ने उन तत्वों को भी कड़ा संदेश दिया जो मंदिर की परंपराओं को लेकर भ्रामक सूचनाएं फैलाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का हस्तक्षेप केवल कुप्रबंधन को रोकने और सुविधाओं को बढ़ाने तक सीमित है न कि धार्मिक आस्थाओं में बदलाव करने के लिए। मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि थिरुपरंकुंड्रम मंदिर सांप्रदायिक सद्भाव का एक अनूठा उदाहरण है, जहाँ विभिन्न समुदायों के लोग मुरुगन के दर्शन के लिए आते हैं। इस एकता को बनाए रखना और मंदिर की गरिमा की रक्षा करना सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है।
एक ऐतिहासिक संकल्प
मुख्यमंत्री के इस बयान को राज्य में एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टालिन की यह पहल उन आरोपों का जवाब है जो सरकार को धर्म-विरोधी बताने का प्रयास करते हैं। मुख्यमंत्री ने सिद्ध कर दिया है कि वे विकास और विरासत को साथ लेकर चलने के पक्षधर हैं। थिरुपरंकुंड्रम के स्थानीय निवासियों और भक्तों ने मुख्यमंत्री के इस रुख का स्वागत किया है। उनका मानना है कि सरकार की इस सक्रियता से न केवल मंदिर की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि विश्व स्तर पर पर्यटन और धार्मिक आस्था के केंद्र के रूप में इसकी पहचान और भी मजबूत होगी।